बालाघाट

बच्चों की संख्या बढ़ने से शुरुआत में बिगड़ी व्यवस्था, अब पर्याप्त इंतजाम : सिविल सर्जन डॉ. जैन

अब तक 400 बच्चों का उपचार, एक की मौत; शेष स्वस्थ होकर लौटे घर - आदिवासी अंचलों में बच्चों के बीमार होने के कई कारण हो सकते हैं

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : आदिवासी अंचलों से बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के जिला अस्पताल पहुंचने के मामले में सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने माना कि शुरुआत में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल की व्यवस्था पर दबाव आया था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और उपचार के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
          डॉ. जैन ने बताया कि प्रारंभिक दौर में जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या सीमित थी, जिसके चलते उपलब्ध संसाधनों में व्यवस्था सुचारू थी। आदिवासी क्षेत्रों से एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे पहुंचने से कुछ समय के लिए अव्यवस्था की स्थिति बनी। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्टाफ, बेड, जांच और उपचार की अतिरिक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि अब तक जिला अस्पताल में लगभग 400 बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जा चुका है। इनमें से अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। उपचार के दौरान एक बच्चे की मौत हुई है। मृत बच्चे को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं, चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
सिविल सर्जन ने कहा कि आदिवासी अंचलों में बच्चों के लगातार बीमार होने के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। शुद्ध पेयजल का अभाव, वातावरण, खान-पान और अन्य स्वास्थ्यगत परिस्थितियां भी बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। एक के बाद दूसरे बच्चे के बीमार होने से मरीजों की संख्या में वृद्धि होती है।
उन्होंने बताया कि भर्ती बच्चों की नियमित निगरानी की जा रही है। चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं और गंभीर स्थिति होने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों के साथ आए परिजनों को भी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में जिला अस्पताल में बच्चों के उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं है।
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