बालाघाट
निलंबन पर उठे सवाल: जांच लंबित होने के बावजूद बी-पैक्स लिपिक पर कार्रवाई क्यों?
लिपिक सतीश अजीत ने प्रभारी उपायुक्त सहकारिता को दिया आवेदन, निलंबन रद्द कर बहाली की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) । बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (बी-पैक्स) बिठली के लिपिक / ऑपरेटर सतीश अजीत के निलंबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सतीश अजीत ने प्रभारी उपायुक्त सहकारिता, बालाघाट को आवेदन देकर निलंबन आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
आवेदन में उन्होंने कहा है कि उनके विरुद्ध विभागीय जांच अभी पूर्ण नहीं हुई है, साथ ही संबंधित मामला थाना रूपझर और न्यायालय में भी विचाराधीन है। इसके बावजूद 29 अगस्त 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया गया।
आरोप सिद्ध हुए बिना कार्रवाई का आरोप
सतीश अजीत का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर भी नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत, बिना आरोपों की पूरी जानकारी और स्पष्टीकरण का मौका दिए एकतरफा कार्रवाई की गई है।
धान शॉर्टेज की राशि पर विवाद
मामले में वर्ष 2024-25 के धान उपार्जन से जुड़ी राशि को लेकर भी विवाद है। आवेदक के अनुसार, पहले उन पर 2,77,840 रुपये की वसूली का उल्लेख किया गया था, जबकि बाद में जांच के आधार पर 6,80,432 रुपये का नोटिस जारी कर दिया गया। सतीश अजीत का कहना है कि उन्होंने इस विसंगति को लेकर पूर्व में ही आपत्ति दर्ज कर पुनः जांच की मांग की थी।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि उपार्जन नीति और अनुबंध की शर्तों के अनुसार खरीदी प्रभारियों के वेतन से की गई कटौती यदि नियमानुसार देय नहीं है, तो उसे ब्याज सहित वापस किया जाना न्यायसंगत होगा।
किसानों के खातों से राशि आहरण का मामला भी उठाया
सतीश अजीत ने आवेदन में कुछ किसानों के खातों से कथित तौर पर राशि निकासी का मुद्दा भी उठाया है। उनका आरोप है कि किसानों के नाम पर फर्जी धान चढ़ाकर राशि आहरित की गई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल एक कर्मचारी के निलंबन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धान उपार्जन, बैंकिंग प्रक्रिया और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े होंगे।
निष्पक्ष जांच की मांग
सतीश अजीत ने जांच रिपोर्ट को एकतरफा बताते हुए मांग की है कि वरिष्ठ संस्था प्रबंधकों की जांच रिपोर्ट, वर्ष 2024-25 में तत्कालीन प्रबंधक द्वारा जारी आदेशों और संबंधित पंचनामों को भी जांच में शामिल किया जाए।
उन्होंने अपने पूर्व सेवा रिकॉर्ड और मानवीय आधार का हवाला देते हुए निलंबन आदेश को तत्काल निरस्त कर सेवा में बहाल करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि सहकारिता विभाग इस मामले में कर्मचारी की दलीलों पर पुनर्विचार करता है या सभी पक्षों को शामिल कर निष्पक्ष जांच की दिशा में कदम बढ़ाता है।




