ललितपुर
अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध दिवस पर देवगढ़ के जंगलों में गूंजी संरक्षण की पुकार
पर्यावरण योद्धाओं ने किया नेचर वॉक

बच्चों ने पहली बार इतने करीब से देखे गिद्ध
प्रकृति के साथ विरासत को भी जाना
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध दिवस पर पर्यावरण योद्धाओं की एक टीम ने देवगढ़ के जंगलों में विशेष नेचर वॉक एवं हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। मानव ऑर्गेनाइजेशन, विकासार्थ विद्यार्थी, भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान, नेहरू महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस प्रकृति भ्रमण का उद्देश्य गिद्धों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को स्थानीय जैव विविधता और ऐतिहासिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना रहा। नेचर वॉक के दौरान बच्चों और युवाओं को जंगल में गिद्धों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का अवसर मिला। बच्चों ने पहली बार गिद्धों को इतनी नजदीक से देखा तो वे रोमांचित और अवाक रह गए। उनके लिए यह अनुभव किताबों और तस्वीरों से अलग प्रकृति को प्रत्यक्ष रूप से समझने वाला अवसर था। प्रतिभागियों ने गिद्धों की उड़ान, उनके व्यवहार और आसपास के पर्यावरण के साथ उनके संबंधों को करीब से देखा और समझा। मानव ऑर्गेनाइजेशन अध्यक्ष एवं पर्यावरणविद् पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने गिद्धों के पारिस्थितिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गिद्ध प्रकृति के अत्यंत महत्वपूर्ण सफाईकर्मी हैं। मृत पशुओं के अवशेषों को शीघ्रता से समाप्त कर वह पर्यावरण को स्वच्छ रखने और अनेक प्रकार के संक्रमण एवं बीमारियों के संभावित प्रसार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने गिद्धों की लगातार कम होती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गिद्धों का संरक्षण केवल किसी एक पक्षी प्रजाति को बचाने का अभियान नहीं है, बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रकृति से जोडऩा संरक्षण की दिशा में सबसे प्रभावी कदम है, क्योंकि जिस प्रकृति को बच्चे करीब से देखेंगे, उसके संरक्षण के प्रति उनमें स्वाभाविक जिम्मेदारी भी विकसित होगी। नेमवि पर्यावरण प्रवक्ता एवं विकासार्थ विद्यार्थी डा.राजीव कुमार निरंजन ने गिद्धों के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को इनके प्राकृतिक आवास, भोजन श्रृंखला में भूमिका तथा संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रजाति के संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज, शिक्षण संस्थानों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। इंग्लैंड से आए अतिथि डिजाइनर निष्काम त्रिपाठी ने गिद्धों को इकोसिस्टम की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उनकी दिनचर्या और प्राकृतिक व्यवहार के बारे में प्रतिभागियों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि प्रकृति में प्रत्येक जीव की अपनी विशिष्ट भूमिका होती है और किसी एक प्रजाति में होने वाला बदलाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है। देवगढ़ सनातन धर्म रक्षा समिति अध्यक्ष आचार्य रवि तिवारी ने गिद्धों के पौराणिक एवं धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त जटायु का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में गिद्ध को केवल एक पक्षी के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि त्याग, साहस, धर्म और कर्तव्य के प्रतीक के रूप में भी सम्मान मिला है। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि पर्यावरण योद्धाओं ने केवल जंगल और गिद्धों का अवलोकन ही नहीं किया, बल्कि देवगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को भी करीब से समझा। नेचर वॉक के बाद प्रतिभागियों ने हेरिटेज वॉक करते हुए देवगढ़ की प्राचीन मूर्तिकला, स्थापत्य और ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन किया। देवगढ़ समिति अध्यक्ष सी.ए. संजीव जैन ने कार्यक्रम में शामिल पर्यावरण योद्धाओं के लिए आवागमन की व्यवस्था में सहयोग किया। इसमें साधना, निशा राजपूत, संध्या राजपूत, अंशिका, भूमिका, अंशिका सिंह, हरिशचंद्र, अंकित कुमार, दीपक, दिव्यांश झा, आदर्श गुप्ता, हर्षवर्धन वर्मा, कृष साहू, परी श्रीवास्तव, प्रिन्सी पुलैया और अभिषेक सहित अनेक पर्यावरण योद्धाओं ने सहभागिता की। गिद्ध बचाओ, प्रकृति बचाओ के संदेश के साथ पर्यावरण योद्धाओं ने संरक्षण का संकल्प भी दोहराया।



