दिल्ली

सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों को मुफ्त आवास दे सरकार: देवेंद्र यादव

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में निजी पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति से मांग की है कि दिल्ली से बाहर से पढ़ने आए छात्रों के लिए तत्काल बिना शुल्क सुरक्षित आवास की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद छात्र निजी पीजी में रहने से डर रहे हैं और सरकार को उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

यादव ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में करीब 2.5 लाख छात्र हैं, जिनमें आधे से अधिक दूसरे राज्यों से आते हैं। डीयू के 91 कॉलेजों में से 71 में छात्रावास की सुविधा है, लेकिन इनमें अधिकतम करीब 9,000 सीटें ही उपलब्ध हैं। वहीं, दिल्ली में कुल सरकारी छात्रावासों की क्षमता लगभग 30,000 सीटों की है। हर साल करीब 71,000 छात्र छात्रावास की मांग करते हैं, लेकिन इनमें से केवल करीब 10 प्रतिशत को ही सीट मिल पाती है।

उन्होंने कहा कि डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह अगले वर्ष तक छात्रावास की सीटें दोगुनी करने की बात कह चुके हैं, लेकिन यह भी छात्रों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। सरकारी छात्रावासों की कमी के कारण हजारों छात्र निजी मकानों में चल रहे पीजी में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में सरकार को डीडीए, एमसीडी और अन्य खाली सरकारी इमारतों का इस्तेमाल कर तत्काल वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी चाहिए।

यादव ने कहा कि पीजी का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने से पहले सरकार छात्रों के लिए वैकल्पिक आवास सुनिश्चित करे। उन्होंने आशंका जताई कि ऑडिट के नाम पर निगम अधिकारी कहीं इसे उगाही का जरिया न बना लें। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बड़े पैमाने पर पीजी सील किए गए तो हजारों छात्र बेघर हो सकते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सत्य निकेतन हादसे की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। हादसे वाली इमारत के निर्माण को वैध मंजूरी मिली थी या नहीं और यदि मंजूरी दी गई थी तो किस अधिकारी ने दी, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

यादव ने बताया कि उपराज्यपाल के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री, एनडीआरएफ प्रमुख, निगम आयुक्त, पुलिस आयुक्त, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति और डीडीए के अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सरकार को सीलिंग की जल्दबाजी के बजाय छात्रों की सुरक्षा और उनके रहने की स्थायी व्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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