दिल्ली

2030 तक भारत का सीनियर लिविंग बाजार 10.1 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद: ASLI-JLL

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

नई दिल्ली : भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच सीनियर लिविंग और वरिष्ठजन देखभाल क्षेत्र में बड़े अवसर उभर रहे हैं। ASLI-JLL की रिपोर्ट ‘इंडियाज़ सिल्वर इकॉनमी: फ्रॉम नीश टू नेसेसिटी’के अनुसार, भारत का सीनियर लिविंग बाजार 2030 तक करीब 10.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके लिए नई आपूर्ति तैयार करने में करीब 7.7 अरब डॉलर के पूंजी निवेश की जरूरत होगी।

जून 2026 तक देश में संगठित सीनियर लिविंग स्टॉक करीब 25,050 यूनिट्स हो चुका है, लेकिन बाजार की पहुंच केवल 1.5 प्रतिशत है। इसके मुकाबले अमेरिका में यह 6-7 प्रतिशत और न्यूजीलैंड में 14-15 प्रतिशत है। 2024 से जून 2026 के बीच इस क्षेत्र ने 14.2 प्रतिशत CAGR दर्ज किया, जो 2019-2023 के 8.5 प्रतिशत की तुलना में तेज वृद्धि है।

भारत की 60 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी करीब 16.69 करोड़ है, जिसके 2050 तक बढ़कर 34.6 करोड़ होने का अनुमान है। वहीं, शहरी और आर्थिक रूप से स्वतंत्र वरिष्ठ परिवारों का बाजार 2026 के 17 लाख से बढ़कर 2030 तक करीब 21 लाख परिवारों तक पहुंच सकता है।

ASLI के चेयरमैन राजगोपाल जी ने कहा कि भारत का एजिंग ट्रांजिशन अब दूर की जनसांख्यिकीय संभावना नहीं, बल्कि वर्तमान वास्तविकता है। उन्होंने असिस्टेड केयर, केयर फाइनेंसिंग, प्रशिक्षित कार्यबल और देखभाल की निरंतरता पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई।

रिपोर्ट में असिस्टेड लिविंग को सबसे बड़े अवसरों में शामिल किया गया है। वर्तमान में देश में करीब 2,100 असिस्टेड लिविंग बेड्स हैं, जबकि 2030 तक लगभग 11,000 बेड्स की जरूरत का अनुमान है। 75 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी में 7.8 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि से इस मांग के और बढ़ने की संभावना है।

JLL के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर करण सिंह सोढ़ी ने कहा कि मौजूदा 25,050 यूनिट्स का स्टॉक 2030 तक लगभग 74,000 यूनिट्स तक पहुंच सकता है। उनके अनुसार, नीतिगत हस्तक्षेप, नियामकीय स्पष्टता और पूंजी निवेश के जरिए इस क्षेत्र के विकास को तेज किया जा सकता है।

रिपोर्ट में महाराष्ट्र और हरियाणा को उभरते नीतिगत मॉडल बताया गया है। साथ ही GST सरलीकरण, रिवर्स मॉर्टगेज, बीमा-संबद्ध उत्पाद, अस्पताल साझेदारी और राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत नीति ढांचे जैसे उपायों की सिफारिश की गई है।

अच्छी तरह संचालित सीनियर लिविंग सुविधाओं में 80-85 प्रतिशत तक ऑक्युपेंसी दर्ज हो रही है, जो गुणवत्तापूर्ण वरिष्ठजन देखभाल की मजबूत मांग को दर्शाती है। आने वाले वर्षों में रेंटल और सेवा-केंद्रित मॉडल, मेमोरी केयर, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ जैसी सुविधाओं के विस्तार से यह क्षेत्र रियल एस्टेट से आगे बढ़कर एक व्यापक वरिष्ठजन देखभाल इकोसिस्टम का रूप ले सकता है।

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