कानपुर
पुराने वैट-सेल्स टैक्स मामलों के समाधान सहित विभिन्न मांगो को लेकर व्यापारियों ने मंडलायुक्त को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कानपुर : शुक्रवार को उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल ने कानपुर सहित प्रदेशभर के व्यापारियों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन कानपुर के मंडल आयुक्त को सौंपा। व्यापारियों ने जीएसटी लागू होने से पूर्व के लंबित वैट एवं सेल्स टैक्स के मामलों में लगातार जारी नोटिसों को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए इनके शीघ्र, सरल एवं पारदर्शी समाधान की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने से पहले के कई पुराने वैट एवं सेल्स टैक्स के मामले वर्षों से लंबित हैं और अब इन मामलों में व्यापारियों को लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं। इससे व्यापारियों के बीच चिंता और भय का वातावरण पैदा हो रहा है। कई मामलों में मूल कर अथवा डिमांड की राशि काफी कम थी, लेकिन वर्षों से जुड़ते आ रहे ब्याज और अन्य देनदारियों के कारण आज वही राशि कई गुना बढ़ चुकी है। व्यापार मंडल ने कहा कि दशकों पुराने मामलों में पुराने बिल, खाते और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराना व्यापारियों के लिए बेहद कठिन हो गया है। ऐसे में पुराने मामलों को वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर मानवीय एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से निस्तारित किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल ने मांग की कि जीएसटी लागू होने से पूर्व के सभी लंबित वैट एवं सेल्स टैक्स मामलों के लिए विशेष लोक अदालत अथवा एकमुश्त समाधान योजना लागू की जाए। पुराने मामलों में वास्तविक मूल देयता का निर्धारण कर व्यापारियों को एकमुश्त निश्चित राशि जमा करने का अवसर दिया जाए। व्यापारियों ने वर्षों से बढ़ते ब्याज एवं अतिरिक्त देनदारी में उचित राहत देने तथा निर्धारित राशि जमा करने वाले व्यापारियों के मामलों को पूर्ण एवं अंतिम रूप से समाप्त करने की मांग की। साथ ही जिन मामलों में विभाग अथवा व्यापारी के पास पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उनमें व्यापारियों को अनावश्यक उत्पीड़न से राहत देने की मांग भी ज्ञापन में की गई। *व्यापारियों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि ऑनलाइन व्यापार के कारण पारंपरिक खुदरा व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है। व्यापार मंडल ने ऑनलाइन ट्रेडिंग पर प्रभावी रोक लगाने अथवा खुदरा व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की। व्यापार मंडल ने जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों को विधान परिषद एवं राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिए जाने की भी मांग उठाई।व्यापारियों का कहना है कि जिस प्रकार शिक्षक एवं स्नातक वर्ग के लिए विधान परिषद में एमएलसी का निर्वाचन होता है, उसी प्रकार जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों को भी प्रतिनिधित्व की सुविधा मिलनी चाहिए। संगठन ने व्यापारियों के लिए कम से कम 10 सीटों के आरक्षण की मांग रखते हुए कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यापारिक वर्ग की लोकतांत्रिक संस्थाओं में पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। ज्ञापन में जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस दिए जाने की मांग भी की गई। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कई लाइसेंस संबंधी आवेदन जिला अधिकारी कार्यालयों में लंबित हैं, लेकिन उन्हें लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा व्यापारियों की दुकानों में आग लगने की स्थिति में एक करोड़ रुपये तक का बीमा,जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों को सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर स्वास्थ्य बीमा तथा व्यापारियों के दुर्घटना बीमा की राशि 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग की गई। व्यापारियों ने सभी विभागों के लाइसेंस की अवधि आजीवन करने तथा बार-बार होने वाले विभागीय छापों को बंद करने की मांग भी उठाई। व्यापार मंडल ने सरकार द्वारा वसूले जाने वाले ब्याज को वर्तमान 18 प्रतिशत से घटाकर 9 प्रतिशत किए जाने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय तक लंबित रहने वाले मामलों में ब्याज की ऊंची दर के कारण मूल देनदारी कई गुना बढ़ जाती है, जिससे व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। व्यापारियों की समस्याओं के स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली व्यापार बंधु बैठक को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि इन बैठकों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा अधिकारियों द्वारा व्यापारियों की समस्याओं के निस्तारण की नियमित मॉनिटरिंग के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए। व्यापार मंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं, ताकि प्रदेश के व्यापारियों को अनावश्यक विभागीय कार्रवाई, पुराने कर मामलों और अन्य समस्याओं से राहत मिल सके। ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान प्रदेश प्रभारी एवं अध्यक्ष कानपुर कपिल सभरवाल, महामंत्री रणजीत सिंह बिल्लू, संयोजक अजय सराफ, युवा अध्यक्ष सौरभ गुप्ता, प्रदेश संगठन मंत्री अनुज जायसवाल, नगर मंत्री नितिन छाबड़ा, नगर मंत्री संजय दुग्गल, रोमी भाटिया संगठन मंत्री नगर रणवीर सिंह, उपाध्यक्ष राजीव मेहता एवं गोपाल बाजपेई सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री स्तर पर इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए पुराने कर मामलों के समाधान के लिए जल्द विशेष योजना लागू की जाएगी, जिससे प्रदेश के व्यापारियों को बड़ी राहत मिल सके।



