बालाघाट

आदिवासी बच्चों की मौत पर सवालों के घेरे में सरकार

32 बच्चों की मौत के दावे के बीच जवाबदेही अब भी तय नहीं, कांग्रेस ने पूछा—मौतों का जिम्मेदार कौन ?

सरकार बोली—चिंतित हैं, हाईकोर्ट ने पूछा—27 बैगा बच्चों की मौत के बाद जागा प्रशासन ?
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : जिले के आदिवासी अंचलों में बीमारी से बच्चों की मौत का मामला अब शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक स्तर पर 32 बच्चों को आर्थिक सहायता दिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर इन मौतों की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई ?
            मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप पहले 2-2 लाख रुपये तथा बाद में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 2-2 लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, बच्चों की मौत और आर्थिक सहायता से संबंधित वायरल सूची की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी से सूची की जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
मौतों पर कार्रवाई क्यों नहीं ?
            मामले ने शासन की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया दिखाई देती है, लेकिन बालाघाट के आदिवासी बच्चों की मौतों के मामले में अब तक जवाबदेही तय नहीं होने से सरकार के दोहरे रवैये पर सवाल उठ रहे हैं।
             कांग्रेस विधायक एवं अध्यक्ष संजय उईके का कहना है कि कांग्रेस शुरुआत से ही इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है। उनका तर्क है कि जिम्मेदारी तय होने से प्रशासनिक कसावट आएगी और व्यवस्था में सुधार का रास्ता खुलेगा।
उईके ने 32 बच्चों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने वास्तव में 32 बच्चों को 4-4 लाख रुपये की सहायता दी है, तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में बच्चों की मौत हुई और जिम्मेदारी किसकी है। उनके अनुसार, आर्थिक सहायता देना अपने आप में समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि मौतों के कारणों और जवाबदेही का निर्धारण जरूरी है।
मंत्री कुंवर विजय शाह बोले—सरकार चिंतित, स्थिति पर नियंत्रण का प्रयास
           वहीं सरकार की ओर से मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि सरकार मामले को लेकर चिंतित है और स्थिति पर नियंत्रण करने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन को जहां आवश्यकता महसूस हुई, वहां संबंधित अधिकारियों को हटाया गया है और नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। मुख्यमंत्री भी मामले को लेकर चिंतित हैं।
                   लेकिन सवाल यही है कि चिंता और अधिकारियों के तबादले के बाद क्या उन मौतों की वास्तविक जवाबदेही भी तय होगी? आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, बीमारी की रोकथाम और समय पर उपचार की व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का ठोस जवाब कब मिलेगा, यह अब भी स्पष्ट नहीं है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, प्रशासन से भी उठे सवाल
           बालाघाट के प्रभावित आदिवासी अंचलों में बच्चों की मौत का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। याचिकाकर्ता की ओर से मैदानी तथ्यों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को प्रस्तावित है।
                 मामले की सुनवाई के दौरान बीमारी प्रभावित गांवों की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर दिए गए तर्क पर हाईकोर्ट ने भी तल्ख सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि क्या प्रशासन 27 बैगा बच्चों की मौतों के बाद जागा है ?
                    अब यह मामला केवल बीमारी और उपचार तक सीमित नहीं रह गया है। 32 बच्चों की मौत के दावे, आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य व्यवस्था और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर इन मासूम मौतों की जवाबदेही कौन तय करेगा ?
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