
नई दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यूपीआई के कुछ मर्चेंट लेनदेन पर लागू नए शुल्क को यूपीआई टैक्स बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर आम जनता पर टैक्स का बोझ डालने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, सरकार का स्पष्ट कहना है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा।
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को उस व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की, जिसे उन्होंने “वढक टैक्स” कहा है। यह व्यवस्था यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस से पेमेंट करते समय कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क में बदलाव करती है। नए नियम के तहत, 2,000 से ज्यादा के कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (टऊफ) लागू किया गया है; हालांकि, सरकार का कहना है कि ग्राहकों से एमडीआर नहीं लिया जाएगा। एक्स पर एक वीडियो मैसेज में — जिसका कैप्शन था, मोदी जी, वढक टैक्स वापस लें। अभी राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वढक पर टैक्स लगाकर हर भारतीय पर टैक्स का बोझ डाला है और अमेरिका को भारी रकम दी है। राहुल गांधी ने वीडियो संदेश में कहा मोदी जी, कृपया अमेरिका के सामने झुकना बंद करें, हिम्मत दिखाएं, सीधे खड़े हों और यूपीआई टैक्स वापस लें।
इससे पहले कांग्रेस ने अमेरिकी संसद में भारत समेत अन्य देशों पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव से जुड़े विधेयक को लाए जाने और देश में यूपीआई लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था से संबंधित मुद्दों को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए भारतीय हितों से लगातार समझौता किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने नोटा का नया अर्थ नरेंद्रस आॅनगोइंग ट्रम्प अपीजमेंट (नरेन्द्र मोदी का लगातार ट्रंप को खुश करना) कर दिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ऐसे समय में जब अमेरिका में भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने वाला विधेयक प्रतिनिधि सभा में विचार के लिए आने वाला है और भारतीय आव्रजकों तथा एच-1बी वीजा धारकों को लेकर अमेरिकी प्रशासन कड़े कदम उठा रहा है, केंद्र सरकार ने यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला किया है। उन्होंने सवाल किया कि यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) क्यों लगाया जा रहा है?
रमेश ने पूछा कि क्या इसकी वजह यह है कि डेबिट कार्ड पर भी एमडीआर 0.4 प्रतिशत है और क्या इस कदम से अमेरिकी कार्ड कंपनियों को यूपीआई के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। कांग्रेस महासचिव ने सरकार के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि शुल्क लगाने से यूपीआई व्यवस्था वित्तीय रूप से टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि पूरे यूपीआई तंत्र को चलाने की अनुमानित वार्षिक लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है और यह राशि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को हस्तांतरित किए गए अधिशेष की तुलना में काफी कम है। रमेश ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से यूपीआई की शून्य-एमडीआर व्यवस्था को लेकर जताई गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इस साल की शुरूआत में यूपीआई के मुफ्त होने और उसके कारण वीजा तथा मास्टरकार्ड जैसी कंपनियों के कारोबार प्रभावित होने का मुद्दा उठाया था।



