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1947 में केवल स्वतंत्रता मिली, सांस्कृतिक स्वतंत्रता नहीं

राजनाथ सिंह का बड़ा दावा

कोच्चि । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोच्चि में कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आजादी मिली, लेकिन सांस्कृतिक आजादी नहीं। उन्होंने पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता और तुष्टीकरण की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि इन्हीं कारणों से राम मंदिर निर्माण में दशकों की देरी हुई। उन्होंने युवाओं से औपनिवेशिक मानसिकता छोड़कर सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 सितंबर को पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आजादी तो मिली, लेकिन सांस्कृतिक आजादी नहीं। उन्होंने केरल के कोच्चि में तीन दिन तक चलने वाले कार्यक्रम ‘रामायण- वन एपिक मेनी स्टोरीज: राम कथा अक्रॉस भारत एंड बियॉन्ड’ (रामायण – एक महाकाव्य, कई कहानियाँ: भारत और उसके बाहर राम कथा) के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। इतिहासकिताबें खोजें
सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के विकास में न केवल आर्थिक तरक्की शामिल होनी चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मजबूत करना और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलना भी जरूरी है। सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का आधुनिकीकरण उसकी सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘सर्व धर्म समभाव’ यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान हमेशा से हमारी सभ्यता की मूल भावना रही है। फिर भी, पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के कारण, हमारे धर्म को सांप्रदायिकता, परंपरा को पिछड़ापन, विश्वास को कट्टरता और आस्था को अंधविश्वास के रूप में पेश किया गया।
राजनाथ सिंह ने युवा पीढ़ी के बीच भारत के इतिहास, संस्कृति और विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय चेतना मजबूत होगी और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्होंने युवाओं से भारत के आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी बदलाव में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक आत्मविश्वासी, सक्षम और सामाजिक रूप से समावेशी भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभर सकता है और दुनिया के भविष्य को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
राम मंदिर के निर्माण में हुई देरी का जिÞक्र करते हुए सिंह ने पूछा कि आजादी के बाद कहा गया था कि भारत की खोई हुई संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन भगवान राम से बेहतर भारत की आत्मा का प्रतीक कौन हो सकता है? फिर आजादी के सात दशक बाद भी राम मंदिर बनने में इतना समय क्यों लगा? ऐसा तुष्टीकरण की नीति के कारण हुआ। यह सोच भारतीय नजरिए के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने समय से पहले जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करके, देश में मुफ़्त कोविड-19 टीके उपलब्ध कराकर और 100 देशों को 30 करोड़ से ज्यादा टीके भेजकर दुनिया के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।
सिंह ने भारत के एक सभ्यतागत लीडर के तौर पर उभरने पर जोर दिया। उन्होंने इसके लिए इंटरनेशनल योग डे के वैश्विक आयोजन और इंटरनेशनल सोलर अलायंस व ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसी पहलों में भारत की लीडरशिप का जिÞक्र किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि दया की भावना से प्रेरित होकर सरकार ने लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए काम किया है और पिछले 10 से 12 सालों में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी डेमोक्रेसी और कल्याणकारी योजनाओं की सफलता के जरिए दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।

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