बागपत
2 अक्टूबर : गांधी और शास्त्री को याद करने का दिन ही नहीं, उनके विचारों को जीने का संकल्प
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
2 अक्टूबर भारत के इतिहास में एक ऐसी तारीख है, जब देश दो महान व्यक्तित्वों को एक साथ याद करता है। इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म हुआ था और इसी दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिवस भी मनाया जाता है। दोनों का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की मिसाल रहा।
महात्मा गांधी ने दुनिया को यह संदेश दिया कि बड़े परिवर्तन के लिए हमेशा हथियारों की आवश्यकता नहीं होती। सत्य और अहिंसा भी परिवर्तन की ताकत बन सकते हैं। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को आम आदमी से जोड़ा और लोगों में आत्मविश्वास पैदा किया। उनका जीवन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम आज सत्य को उतना ही महत्व देते हैं, जितना अपने स्वार्थ को?
गांधी जी के लिए स्वच्छता केवल सड़क और गलियों की सफाई तक सीमित नहीं थी। उनके विचारों में स्वच्छता का अर्थ शरीर, घर, समाज और विचारों की स्वच्छता भी था। आज हम स्वच्छ भारत की बात करते हैं, लेकिन वास्तविक स्वच्छता तभी होगी जब कूड़ा सड़क पर फेंकने के साथ-साथ हम अपने भीतर की नफरत, लालच, झूठ और भेदभाव को भी कम करने का प्रयास करें।
दूसरी ओर लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा। प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बावजूद उनका जीवन आम आदमी से जुड़ा रहा। ‘जय जवान, जय किसान’ का उनका संदेश आज भी देश के लिए महत्वपूर्ण है। जवान देश की सीमाओं की रक्षा करता है तो किसान देश का पेट भरता है। दोनों के सम्मान और मजबूती के बिना देश की प्रगति अधूरी है।
आज 2 अक्टूबर पर हम गांधी और शास्त्री की तस्वीरों पर फूल चढ़ाते हैं, कार्यक्रम आयोजित करते हैं और भाषण देते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि उनके विचार हमारे जीवन में कितने बचे हैं?
यदि हम गांधी को याद करते हैं तो हमें सत्य बोलने का साहस भी रखना होगा। यदि हम शास्त्री को याद करते हैं तो हमें ईमानदारी और सादगी को भी अपनाना होगा। देशभक्ति केवल नारे लगाने से नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाने से साबित होती है।
आज के समय में जब सफलता का अर्थ अक्सर धन, पद और प्रतिष्ठा से लगाया जाता है, तब गांधी और शास्त्री का जीवन हमें याद दिलाता है कि सच्ची महानता व्यक्ति के आचरण में होती है। ईमानदारी, विनम्रता, त्याग और समाज के प्रति जिम्मेदारी ही किसी जीवन को वास्तव में सार्थक बनाती है।
आज समाज में बढ़ती आपसी दूरी, दिखावे की प्रवृत्ति, उपभोक्तावाद और स्वार्थ के बीच गांधी और शास्त्री के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक दिखाई देते हैं। हमें अपने बच्चों को केवल सफल बनने की शिक्षा नहीं, बल्कि अच्छा इंसान बनने की शिक्षा भी देनी होगी।
2 अक्टूबर इसलिए केवल दो महान नेताओं की जयंती नहीं है। यह आत्ममंथन का दिन है—कि जिस भारत का सपना गांधी और शास्त्री ने देखा था, उस भारत के निर्माण में हमारा अपना योगदान क्या है?
आइए, इस 2 अक्टूबर पर हम केवल माल्यार्पण न करें। एक छोटा-सा संकल्प लें—सत्य का साथ देंगे, स्वच्छता अपनाएंगे, किसान और जवान का सम्मान करेंगे, जरूरतमंद की मदद करेंगे और अपने बच्चों को संस्कार देंगे।
यही गांधी और शास्त्री को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


