मथुरा

संत रमेश बाबा की माताजी गोशाला में विदाई के लिए उमड़ा जनसमूह

श्रद्धालुओं की नम हुई आंखें

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा। बरसाना में पद्मश्री संत रमेश बाबा को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। माताजी गोशाला में संतों, अनुयायियों और हजारों ब्रजवासियों की मौजूदगी में राज बाबा ने रमेश बाबा को मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें छलक उठीं। बुधवार को गहवरवन स्थित रस मंडप से रमेश बाबा की अंतिम यात्रा शुरू हुई। अंतिम डोले को फूलों से सजाया गया था। जैसे ही डोला गहवरवन से बाहर निकला, मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में ब्रजवासी और श्रद्धालु हाथ जोड़े खड़े नजर आए। बाबा के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर किसी की आंखें नम थीं। अंतिम डोला ब्रह्माचल की परिक्रमा के लिए निकला तो रास्ते में किसी के हाथ में फूल थे तो कोई माला लेकर खड़ा था। डोला सामने आते ही श्रद्धालुओं ने भावुक होकर संत को पुष्प अर्पित किए। डोला माताजी गोशाला पहुंचा। यहां बाबा को मुखाग्नि दी गई। रमेश बाबा ने मान मंदिर को साधना स्थली बना गोसेवा की। उन्हें वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। संत रमेश बाबा की अंतिम यात्रा गहवरवन से निकली तो लगा जैसे पूरा ब्रज अपनेकिसी आत्मीय को विदा करने उमड़ पड़ा हो। जिस ब्रज की धूल को उन्होंने माथे का चंदन माना, उसी धूल में उनकी देह आखिरकार पंचतत्व में विलीन हो गई। वर्ष 1938 में तीर्थराज प्रयाग में जन्मे रमेश बाबा के पिता बलदेव प्रसाद शुक्ल विख्यात ज्योतिषाचार्य थे और माता हेमेश्वरी देवी गृहिणीं थीं। बचपन से ही उनके भीतर आध्यात्मिक चेतना थी। गृहस्थ जीवन से विरक्त होकर ब्रज पहुंचे रमेश बाबा ने बरसाना के ब्रह्माचल पर्वत स्थित मान मंदिर को अपनी साधना स्थली बना लिया। यहीं से उनकी छह दशक लंबी ब्रज सेवा यात्रा शुरू हुई।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button