ललितपुर
श्री श्री 1008 श्री सिद्ध बाबा मन्दिर ग्राम राखपंचमपुर
राखपचंमपुर मेला कैसे हुआ शुरू मेला का उत्पत्ति इतिहास

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। विकास खण्ड जखौरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम राखपंचमपुर में स्थित श्री श्री 1008 श्री सिद्ध बाबा जी महाराज मेला की उत्पत्ति इतिहास इस प्रकार है। करीबन 350 वर्ष पूर्व श्री बहोरे माते गोत्र शिवासिया निवासी पंचमपुर के गरीब किसान थे वे रोज की भांति अपनी गाय चराने जंगल में गये हुये थे। जैसे ही वह अपनी गाय चराने के लिये झिरना पहाड़ी नाम के जंगल में पहुंचे दोपहर का समय था, वहां गायों के लिये पानी पीने की व्यवस्था थी। श्री बहोरो माते अपनी गायों को पानी पिलाकर आराम कर रहे थे और चैत्र मास कृष्ण पक्ष रंगपंचमी का दिन था, उसी समय सफेद घोड़े पर बैठे सफेद वस्त्र पहने साधु बाबा बहोरे गाय चराने वाले के पास पहुंचे और बहोरे बाबा को आवाज लगाकर नींद से जगाया और साधु बाबा ने बहोरे बाबा से कहा कि मेरी बात ध्यान से सुनो तुम्हें मेरा एक काम करना है में एक सिद्ध साधु हूं और तुम्हें मेरे नाम से भभूति (राख) लगाकर नीम के झोरे से गरीब और असहाय लोगों के झाडऩा है खता, खाज, फोड़ा, फुन्सी आदि चर्म रोग को झाडऩा है मैं उनके दुख दूर करुंगा और बदले में कुछ नहीं मांगना आटा ,दाल, चावल,नमक, मिर्ची सीदा ही चढ़ावे में लेना। इतना कहकर साधु बाबा कुछ दूर जाकर अद्रस्य हो गये बहोरे माते शाम को अपने घर पहुंचे और गांव वालों को यही सब चमत्कार के बारे में बताया गांव वालों ने उनकी बात मानी और बहोरे माते गांव वालों के साथ उसी स्थान पर पहुंच और साधु बाबा के बताये हुये नियम पर बहोरे बाबा ने कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने भवूति (राख) और नीम के झोरे से झाडऩा प्रारम्भ किया और रोगियों को रोग से आराम मिलने लगा धीरे धीरे प्रचार हुआ और श्री सिद्ध बाबा जी के नाम से स्थान का नाम विख्यात हुआ। आज भी यही मान्यता है किसी भी प्रकार का कोई भी चर्म रोग हो और वह रोगी श्री सिद्ध बाबा जी के दरबार में आकर श्री सिद्ध बाबा के दर्शन कर भभूति (राख) नीम के झोरे से बहोरे बाबा के वंशजों द्वारा झड़वाकर रोग से छुटकारा मिलता है इसी प्रकार श्री सिद्ध बाबा मन्दिर राखपंचमपुर मेला की शुरुआत हुई आज भी बहोरे बाबा के वंशज श्री सिद्ध बाबा मन्दिर पर अपनी सेवाये दे रहे हैं बहोरे बाबा से लेकर आज तक पन्डा पुजारी की सेवायें इस प्रकार है।



