नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
खैरथल। जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति द्वारा जिला मुख्यालय को यथावत रखने की मांग को लेकर चलाया जा रहा धरना सोमवार को 263वें दिन में प्रवेश कर गया। इतने लंबे समय से लगातार जारी इस आंदोलन के बावजूद अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से आंदोलनकारियों में रोष और निराशा दोनों ही देखने को मिल रहे हैं।
धरना स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि खैरथल क्षेत्र के विकास, पहचान और भविष्य से जुड़ा सवाल है। उनका मानना है कि जिला मुख्यालय का स्थानांतरण क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय है और इससे आमजन को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें हर वर्ग और आयु के लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। विशेष रूप से 87 वर्षीय बुजुर्ग विधायक दीपचंद खैरिया का नियमित रूप से धरना स्थल पर उपस्थित होना आंदोलनकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका जोश और समर्पण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वे प्रतिदिन धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को मजबूती प्रदान कर रहे हैं और सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील कर रहे हैं।
संघर्ष समिति के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने का प्रयास किया, ज्ञापन सौंपे, शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है। इससे यह साफ प्रतीत होता है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका यह भी कहना है कि यह लड़ाई लंबी जरूर है, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि अंततः सत्य की जीत होगी और सरकार को जनता के सामने झुकना ही पड़ेगा।
आंदोलनकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सरकार ने इस विषय पर कोई निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके तहत बड़े स्तर पर प्रदर्शन, रैली और अन्य लोकतांत्रिक तरीके अपनाए जा सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला मुख्यालय का मुद्दा उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा हुआ है। यदि मुख्यालय दूर चला जाता है, तो सरकारी कामकाज के लिए उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय और धन दोनों की हानि होगी।
कुल मिलाकर, 263 दिनों से लगातार चल रहा यह धरना अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। सरकार की चुप्पी जहां एक ओर सवाल खड़े कर रही है, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारियों का हौसला भी दिन-प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर कब और क्या निर्णय लेती है।
धरने पर आज गिरीश डाटा, पंकज रोघा,वीर सिंह ढ़िल्लन, महेंद्र जांगिड, हेंमन्त गूर्जर, जमालुद्दीन,पोनी गुप्ता,कृष्ण चौधरी, हिमांशु जांगिड़, जयप्रकाश, सुभाष यादव,श्यामलाल शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे


