बरेली
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय यूपीसीसीडीएसआईकोन आरंभ
जन स्वास्थ्य पर विशेष जागरूकता जरूरीः डा.धीमन

स्वास्थ्य क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मरीज के पास रह कर सीखना जरूरीः देव मूर्ति
नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली : मरीजों का उपचार, भविष्य के चिकित्सकों को शिक्षा एवं ट्रेनिंग, बीमारियों पर शोध और जन स्वास्थ्य पर जागरूकता, यह स्वास्थ्य संस्थानों के चार पिलर हैं। इन सभी पर एक साथ काम होना जरूरी है। इसमें भी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर स्वस्थ समाज निर्माण सबसे जरूरी जिम्मेदारी है। यह बात एसजीपीजीआई लखनऊ के डायरेक्टर पद्मश्री डॉ.आरके धीमन ने एसआरएमएस मेडिकल कालेज में दो दिवसीय कांफ्रेंस दूसरी यूपीसीसीडीएसआईकोन और एसआरएमएस मेडिसिन अपडेट के छठवें संस्करण के पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र में कही। उन्होंने कहा कि किसी भी इंस्टीट्यूट का कद वहां किए जा रहे रिसर्च से ही बढ़ता है। इसी रिसर्च में आगे रहने की बदौलत ही एम्स जैसे संस्थान एक ब्रांड बने हैं। समय की जरूरत है कि चिकित्सकों के साथ ही विद्यार्थी भी रिसर्च पर फोकस करें। आईसीएमआर जैसी संस्थाएं इसके लिए विद्यार्थियों को एक लाख की ग्रांट प्रदान करती हैं। डॉ.धीमन ने मरीजों के उपचार में बीमारियों के प्रति जागरूकता की कमी और पोषण की कमी को भी महत्वपूर्ण बताया और स्वास्थ्य संस्थानों को इस पर काम करने की सलाह दी।
एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया की बरेली शाखा (एपीआई) के सहयोग से एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के जनरल मेडिसिन विभाग और क्लिनिको कार्डियो डायबिटीज सोसायटी ऑफ इंडिया यूपी चैप्टर (यूपीसीसीडीएसआई) की ओर से शनिवार (9 मई 2026) को दो दिवसीय छठवीं एसआरएमएस मेडिसिन अपडेट और दूसरी यूपीसीसीडीएसआईकोन कांफ्रेंस आरंभ हुई। इसके पहले दिन उद्घाटन सत्र के साथ 8 साइंटिफिक सत्र हुए, जिसमें देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मधुमेह, कार्डियो-मेटाबोलिक रोग, हाइपरटेंशन, किडनी रोग, यौन स्वास्थ्य एवं आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर नवीनतम जानकारियां साझा कीं। उद्घाटन सत्र में एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति जी ने मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को मरीज के पास बेड साइड रह कर सीखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाजसेवा का यह पेशा लगातार काम मांगता है। ऐसे में विद्यार्थियों का काम में पीछे रहना, सीखने की इच्छा न होना और डिप्रेशन में रहना गंभीर स्थिति है। इससे निजात पाकर ही मरीजों का उपचार कर अपने नाम को ब्रांड बनाया जा सकता है। विशिष्ठ अतिथि के रूप में क्लिनिको कार्डियो डायबिटीक सोसायटी ऑफ इंडिया के फाउंडर प्रेसिडेंट डा.एएन राय ने तेजी से बढ़ते असंचारी रोगों पर विचार विमर्श के लिए गठित क्लिनिको कार्डियो डायबिटीज सोसायटी ऑफ इंडिया (सीसीडीएसआई) की स्थापना की जानकारी दी। उन्होंने जीवन शैली पर आधारित बीमारियों, उनकी रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। साथ ही जागरूकता पर भी जोर दिया। कहा कि 10 वर्ष पहले स्थापित सीसीडीएसआई ने इस पर महत्वपूर्ण काम किया है। संस्था की ओर से अगले महीने पहली बार यूके चैप्टर का आयोजन किया जा रहा है। कांफ्रेस में विशिष्ठ अतिथि के रूप में शामिल रिसर्च सोसायटी फार स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) के प्रेसिडेंट डॉ.अनुज महेश्वरी ने बढ़ते मेडिकल संस्थानों के बाद भी बीमारियों पर रिसर्च कार्य में पिछड़ने पर दुख जताया और इस पर पर जोर दिया। उन्होंने अपनी संस्था द्वारा रिसर्च पर दिए जा रही ग्रांट की भी जानकारी दी। इससे पहले उद्घाटन सत्र के आरंभ में एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डा.एमएस बुटोला ने सभी का स्वागत किया और कांफ्रेंस की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी एवं एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज स्थित मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) स्मिता गुप्ता ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। उद्घाटन सत्र का संचालन डा.हिमांशी खट्टर ने किया।
कांफ्रेंस के साइंटिफिक सत्र में डॉ.मधुकर राय ओरेशन में जमशेदपुर के डॉ.अनिल कुमार विरमानी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में क्लीनिकल मेडिसिन विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव और भविष्य की चिकित्सा प्रणाली में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं डा. अनुज माहेश्वरी ने डायबिटीज में रेजिस्टेंट हाइपरटेंशन, एबीपीएम तथा स्टेप-वाइज मॉनिटरिंग की आवश्यकता पर विस्तृत व्याख्यान दिया। मुख्य वक्ता के रूप में एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री डॉ. आरके धीमन ने आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान एवं गुणवत्तापूर्ण रोगी देखभाल पर व्याख्यान दिया। कार्डियोमेटाबालिक मेडिसिन का विकास सत्र में लो-ग्रेड क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन, एथेरोस्क्लेरोसिस तथा कार्डियो-मेटाबोलिक रोगों के बीच संबंधों पर गहन चर्चा हुई। डिस्लिपिडेमिया के आधुनिक प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने व्यावहारिक सुझाव दिया। कांफ्रेंस के विशेष सत्र ब्रेकिंग द साइंस में वर्ष 2026 में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन विषय पर डॉ. दीपक जुमानी ने यौन स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों, मानसिक प्रभावों एवं आधुनिक उपचार विकल्पों पर खुलकर चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार के विषयों पर जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक शोध, उपचार पद्धतियों एवं वैश्विक गाइडलाइंस से अवगत कराना है, जिससे रोगियों को बेहतर एवं साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।




