बागपत

सुरक्षित मातृत्व ही स्वस्थ समाज की नींव: डॉ. सुमेधा आर्य ने गर्भवती महिलाओं को दिए विशेष स्वास्थ्य मंत्र

“मां और शिशु की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता, जागरूकता ही बचाव”

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बड़ौत। दिल्ली-सहारनपुर रोड स्थित उत्तम हॉस्पिटल में वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमेधा आर्य द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य परामर्श साझा किए गए। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार सुरेंद्र मलानिया ने कहा कि वर्तमान समय में मातृ स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज की आधारशिला होती है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में आज भी कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान सही जानकारी के अभाव में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं। समय पर जांच, संतुलित आहार और विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से अधिकांश जटिलताओं से बचा जा सकता है।
“गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा केवल परिवार ही नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। अक्सर जानकारी के अभाव, लापरवाही या अंधविश्वास के कारण मां और नवजात दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। हमें यह समझना होगा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, सही पोषण और विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह किसी वरदान से कम नहीं। डॉ. सुमेधा आर्य जैसी अनुभवी चिकित्सक महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दे रही हैं। हर परिवार को गर्भवती महिला की देखभाल को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”
डॉ. सुमेधा आर्य ने बताए सुरक्षित गर्भावस्था के महत्वपूर्ण सूत्र
डॉ. सुमेधा आर्य ने कहा कि गर्भावस्था के नौ महीने अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान छोटी सी लापरवाही भी मां और शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। उन्होंने बताया कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए महिला का शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से संतुलित और चिकित्सकीय रूप से मॉनिटर रहना बेहद जरूरी है।
1. नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC Checkup)
डॉ. आर्य ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला को समय-समय पर ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, शुगर, वजन और अल्ट्रासाउंड जांच अवश्य करानी चाहिए। इससे गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति और मां के स्वास्थ्य का सही आकलन होता है।
2. पोषणयुक्त भोजन है सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
उन्होंने सलाह दी कि गर्भवती महिलाओं को आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, प्रोटीन और विटामिन युक्त भोजन लेना चाहिए।
हरी पत्तेदार सब्जियां
ताजे फल
दूध और दही
दालें व सूखे मेवे
नारियल पानी
ये मां और शिशु दोनों के विकास में सहायक हैं।
3. पानी और आराम की अनदेखी न करें
शरीर में पानी की कमी से कमजोरी, चक्कर और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। पर्याप्त पानी, नींद और आराम गर्भावस्था में बेहद जरूरी है।
4. मानसिक तनाव से दूरी
डॉ. आर्य ने बताया कि गर्भवती महिला का मानसिक स्वास्थ्य सीधे शिशु पर प्रभाव डालता है। सकारात्मक माहौल, परिवार का सहयोग और तनावमुक्त जीवन स्वस्थ गर्भावस्था के लिए आवश्यक है।
5. सामान्य प्रसव के लिए सक्रिय जीवनशैली
हल्की सैर, डॉक्टर की सलाह अनुसार योग और नियमित दिनचर्या सामान्य डिलीवरी की संभावनाओं को बेहतर बना सकती है।
6. घरेलू मिथकों से बचें
उन्होंने चेतावनी दी कि बिना चिकित्सकीय सलाह घरेलू नुस्खों या गलत सलाह पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
खतरे के संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें
तेज सिरदर्द
सूजन बढ़ना
रक्तस्राव
पेट में असामान्य दर्द
बच्चे की हलचल कम होना
ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
परिवार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण
डॉ. सुमेधा आर्य ने कहा कि गर्भवती महिला को केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता होती है। परिवार यदि सकारात्मक वातावरण दे तो महिला का आत्मविश्वास बढ़ता है और प्रसव प्रक्रिया भी बेहतर होती है।
सुरक्षित मातृत्व पर विशेष संदेश
“एक स्वस्थ मां ही स्वस्थ पीढ़ी को जन्म देती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान सावधानी, सही जानकारी और विशेषज्ञ चिकित्सा को अपनाना हर परिवार का कर्तव्य होना चाहिए।”
उत्तम हॉस्पिटल द्वारा महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच, सुरक्षित सामान्य प्रसव, स्त्री रोग उपचार और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। क्षेत्र की अनेक महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को नई मजबूती मिल रही है।
संदेश स्पष्ट है—जागरूक मां, सुरक्षित शिशु और स्वस्थ समाज।
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