बागपत
हिट वेव का कहर: बढ़ती गर्मी में नवजात की सुरक्षा कैसे करें?
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र मलिक (रेलवे रोड, बड़ौत) से विस्तृत खास बातचीत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : उत्तर भारत में लगातार बढ़ती गर्मी, तपती दोपहर, लू के थपेड़े और तापमान के नए रिकॉर्ड आमजन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। जहां बड़े लोग किसी तरह गर्मी सह लेते हैं, वहीं नवजात शिशु इस मौसम में सबसे संवेदनशील वर्ग बन जाते हैं। नवजात का शरीर बेहद कोमल होता है, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता सीमित होती है और तापमान नियंत्रण की क्षमता भी पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में हीट वेव उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
इन्हीं गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र मलानिया ने रेलवे रोड बड़ौत के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र मलिक से विस्तारपूर्वक बातचीत की, ताकि अभिभावकों तक सही जानकारी पहुंचे और नवजातों को सुरक्षित रखा जा सके।
सवाल: डॉक्टर साहब, सबसे पहले यह बताइए कि हिट वेव नवजात शिशुओं के लिए कितनी खतरनाक है?
डॉ. जितेंद्र मलिक:
हिट वेव नवजात के लिए सामान्य गर्मी से कहीं अधिक खतरनाक है। नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान स्वयं नियंत्रित नहीं कर पाते। अधिक तापमान में उनका शरीर तेजी से पानी खोता है, जिससे डिहाइड्रेशन, शरीर का अत्यधिक गर्म होना, बुखार, कमजोरी, त्वचा रोग, दस्त, उल्टी और गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक तक हो सकता है। कई बार माता-पिता यह समझ नहीं पाते कि बच्चा गर्मी से प्रभावित हो रहा है, और लापरवाही स्थिति को गंभीर बना देती है।
सवाल: किन परिवारों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
डॉ. मलिक:
जिन परिवारों में समय से पहले जन्मे बच्चे (Premature Baby), कम वजन वाले नवजात, या पहले से किसी बीमारी से ग्रसित बच्चे हैं, उन्हें विशेष सावधानी रखनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिजली या ठंडक के संसाधन सीमित हैं, वहां खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
सवाल: नवजात को गर्मी से बचाने के सबसे प्रभावी घरेलू उपाय क्या हैं?
डॉ. मलिक:
नवजात की सुरक्षा के लिए कुछ बुनियादी लेकिन बेहद जरूरी उपाय हैं—
1. स्तनपान सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
मां का दूध बच्चे के लिए भोजन ही नहीं, बल्कि पानी की जरूरत भी पूरी करता है। गर्मियों में बच्चे को नियमित अंतराल पर स्तनपान कराना बेहद जरूरी है।
2. सूती और हल्के कपड़े पहनाएं
बच्चे को फैशन के नाम पर भारी या सिंथेटिक कपड़े पहनाना नुकसानदेह हो सकता है। हल्के सूती कपड़े शरीर को सांस लेने देते हैं।
3. कमरे का तापमान संतुलित रखें
कमरा हवादार हो, सीधी गर्म हवा न आए। कूलर या एसी का प्रयोग करें तो तापमान संतुलित रखें।
4. धूप से पूरी दूरी
सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बच्चे को बाहर ले जाने से बचें।
5. स्वच्छता बेहद जरूरी
गर्मी में संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए बच्चे के कपड़े, बिस्तर और बोतल आदि पूरी तरह साफ रखें।
सवाल: क्या छोटे बच्चों को पानी देना चाहिए?
डॉ. मलिक:
छह महीने से कम उम्र के बच्चे को सामान्य परिस्थितियों में अलग से पानी देने की आवश्यकता नहीं होती, यदि मां पर्याप्त स्तनपान करा रही है। लेकिन यदि बच्चा सुस्त लगे, होंठ सूखे हों, पेशाब कम हो या दूध कम पी रहा हो, तो यह डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलें।
सवाल: कौन से लक्षण संकेत देते हैं कि बच्चा हीट वेव से प्रभावित हो रहा है?
डॉ. मलिक:
अभिभावक इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें—
शरीर अत्यधिक गर्म लगना
तेज बुखार
दूध पीने में कमी
अत्यधिक रोना या सुस्ती
पेशाब कम आना
त्वचा का सूखना
उल्टी या दस्त
सांस लेने में परेशानी
यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो घरेलू उपायों में समय न गंवाएं।
सवाल: गांवों में जहां एसी या बेहतर सुविधाएं नहीं हैं, वहां क्या करें?
डॉ. मलिक:
ग्रामीण परिवार पारंपरिक उपायों से भी काफी हद तक सुरक्षा कर सकते हैं—
मिट्टी के घर या ठंडे कमरे का उपयोग
खिड़की-दरवाजों से वेंटिलेशन
पतले सूती वस्त्र
दिन में बाहर जाने से परहेज
मां के खानपान और पानी पर विशेष ध्यान
सुरेंद्र मलानिया का वक्तव्य:
“आज की भीषण गर्मी केवल मौसम परिवर्तन नहीं, बल्कि नवजातों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है। गांव-देहात से लेकर शहरों तक कई परिवार जानकारी के अभाव में छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिनकी कीमत मासूम बच्चों को चुकानी पड़ती है। एक पत्रकार होने के नाते मेरा उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना भी है। यदि एक भी परिवार इस जानकारी से अपने नवजात की सुरक्षा कर सके, तो यह प्रयास सार्थक होगा। बच्चों की सुरक्षा ही समाज के भविष्य की सुरक्षा है।”
डॉ. जितेंद्र मलिक की अंतिम सलाह:
“नवजात को गर्मी से बचाना इलाज से कहीं अधिक आसान है। सावधानी, स्तनपान, स्वच्छता और समय पर चिकित्सकीय सलाह—यही चार मजबूत स्तंभ हैं।”
हीट वेव के इस दौर में नवजात की देखभाल सामान्य जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विशेष सतर्कता का विषय है। माता-पिता की जागरूकता, डॉक्टर की सलाह और समय पर सावधानी से नवजात को गंभीर खतरे से बचाया जा सकता है।


