कैराना

हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद मेले की तैयारी पर बवाल, सभासदों ने खोला मोर्चा

डीएम को सौंपा ज्ञापन

 “मेला लगा तो चौपट होगा कारोबार, पहले भी झूले से जा चुकी है जान”
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
कैराना। प्रस्तावित मेले को लेकर नगर में विवाद गहराता जा रहा है। मेले के विरोध में अब नगर पालिका के सभासद खुलकर मैदान में उतर आए हैं। सभासदों ने जिलाधिकारी शामली को ज्ञापन सौंपते हुए मेले पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि मेला लगने से स्थानीय व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित होता है, वहीं पूर्व में लगे मेले में झूले से गिरकर एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में लोगों की जान जोखिम में डालकर मेला लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
जिलाधिकारी शामली को सौंपे ज्ञापन में सभासदों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्टे आदेश का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर मेला लगाने की तैयारी की जा रही है, जो गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर मेले पर रोक लगाने की मांग उठाई है। डीएम को दिए गए शिकायत पत्र में नगर पालिका परिषद कैराना के सभासदों ने स्पष्ट लिखा कि नगर पालिका ही अपने मेले की अनुमति देने की अधिकारिक संस्था है,लेकिन कथित रूप से कुछ लोग नगर की सीमा क्षेत्र में बिना पालिका की अनुमति के अवैध तरीके से मेला संचालित कराने की तैयारी कर रहे हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि नगर पालिका बोर्ड ने पूर्व में प्रस्ताव पारित कर मेला न लगाने का निर्णय लिया था, बावजूद इसके कथित रूप से तैयारी जारी है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि एक व्यक्ति द्वारा नगर पालिका की अनुमति के बिना तथा हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए मेला लगाने की कार्रवाई की जा रही है।
“मेला नहीं, हादसों का अड्डा बनता है”
सभासदों ने कहा कि पूर्व में लगे मेले में झूले से गिरकर एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर मेले की अनुमति देना लोगों की जान से खिलवाड़ होगा। उनका कहना था कि मेले में लगने वाले झूलों, अस्थायी संरचनाओं और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था हमेशा सवालों के घेरे में रही है।
कारोबार पर असर व्यापारियों में भी नाराजगी
विरोध कर रहे सभासदों का कहना है कि मेले के दौरान अस्थायी दुकानों और बाहरी कारोबारियों के आने से स्थानीय व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित होता है। नगर के स्थायी व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे बाजार व्यवस्था भी प्रभावित होती है। सभासदों का कहना है कि जब नगर पालिका की अनुमति नहीं है तो मेले की तैयारी किस आधार पर हो रही है? यदि हाईकोर्ट का स्टे आदेश मौजूद है तो उसका पालन कौन कराएगा? पूर्व में हादसा होने के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा क्यों नहीं हुई? स्थानीय कारोबारियों की आजीविका से जुड़े सवालों को प्रशासन क्यों नजरअंदाज कर रहा है?अब देखना होगा कि सभासदों के विरोध और ज्ञापन के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है और प्रस्तावित मेले पर रोक लगती है या नहीं।
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