पाकुड़

सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य विषय पर विधिक जागरूकता एवं सशक्तिकरण शिविर आयोजित

Legal awareness and empowerment camp organized on the topic of safe childhood, safe future

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।

पाकुड़। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), पाकुड़ द्वारा “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य” विषय पर विधिक जागरूकता एवं विधिक सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति संजय प्रसाद, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डीएलएसए दिवाकर पांडे, उपायुक्त सह उपाध्यक्ष डीएलएसए मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, फैमिली जज रजनीकांत पाठक, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरभ चंद्रा तथा बार एसोसिएशन के सचिव दीपक कुमार ओझा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, अधिकार एवं निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही बाल संरक्षण, बाल विवाह निषेध, पॉक्सो अधिनियम एवं कानूनी सहायता संबंधी प्रावधानों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। न्यायपालिका एवं प्रशासन के समन्वय की सराहना प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे ने कहा कि पाकुड़ जैसे जिले में माननीय न्यायमूर्ति का आगमन पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने उपायुक्त श्रीमती मेघा भारद्वाज की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अल्प समय में प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत किया है तथा न्यायपालिका एवं प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक श्री अनुदीप सिंह की भी कार्यक्रम को सफल बनाने में निभाई गई भूमिका की प्रशंसा की। अवर निरीक्षक विकण कुमार ने पॉक्सो एक्ट के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने बताया कि यह जेंडर न्यूट्रल कानून है, जिसमें लड़के और लड़कियां दोनों समान रूप से संरक्षित हैं। 18 वर्ष से कम आयु के सभी व्यक्ति इस कानून के तहत बच्चे माने जाते हैं। कार्यक्रम के दौरान नव नियुक्त चौकीदारों की टीम द्वारा बाल विवाह, पॉक्सो एक्ट एवं बाल संरक्षण से संबंधित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से बच्चों की तस्करी, बाल विवाह एवं यौन अपराधों जैसे गंभीर विषयों पर प्रभावी संदेश दिया गया। फैमिली जज  रजनीकांत पाठक ने कहा कि “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य” केवल एक विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहानी के माध्यम से बच्चों की तस्करी, बाल श्रम एवं यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक किया। उपायुक्त  मेघा भारद्वाज ने कहा कि बच्चों का सुरक्षित, स्वस्थ एवं सर्वांगीण विकास जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि जिले में 1285 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां लगभग 91 हजार बच्चों के पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिले में चिल्ड्रेन विद स्पेशल नीड्स के लिए संस्थागत एवं गैर-संस्थागत स्तर पर कार्य किया जा रहा है। बाल कल्याण समिति के माध्यम से संचालित बाल आश्रय गृह में वर्तमान में 38 बच्चों की देखभाल की जा रही है। वहीं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 236 बच्चों को सहायता प्रदान की जा रही है। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों की सुरक्षा एवं पुनर्वास के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखने की अपील की। माननीय न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने कहा कि इस प्रकार के विधिक जागरूकता शिविरों का उद्देश्य लोगों को महिलाओं, बच्चों एवं दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनाना है। उन्होंने बच्चों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत एवं नुक्कड़ नाटक की सराहना करते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चों एवं महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। माननीय न्यायमूर्ति, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं उपायुक्त ने कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस दौरान जेएसएलपीएस, पोषण अभियान एवं “पोषण के पांच सूत्र” से संबंधित स्टॉलों का अवलोकन कर अधिकारियों को जनजागरूकता गतिविधियों को और प्रभावी ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं के तहत लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों एवं स्वीकृति पत्रों का वितरण किया गया। जेएसएलपीएस के तहत 75 स्वयं सहायता समूहों को कुल 1 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये की क्रेडिट लिंकेज राशि उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका नियुक्ति पत्र, अबुआ आवास एवं पीएम जनमन योजना के स्वीकृति पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, योगा किट, कृषि उपकरण एवं अन्य योजनाओं के लाभ वितरित किए गये। न्यायालय द्वारा मोटर दुर्घटना दावा वादों से संबंधित कुल 7 मामलों में लाभुकों के बीच 98 लाख 18 हजार रुपये की मुआवजा राशि का चेक वितरण किया गया। लाभुकों ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डीएलएसए सचिव सुश्री रूपा वंदना कीरो ने किया, जबकि समापन पुलिस अधीक्षक श्री अनुदीप सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर परियोजना निदेशक आईटीडीए, अपर समाहर्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सहित कई न्यायिक पदाधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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