हजारीबाग

पूर्व सदर विधानसभा प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने  शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का किया दौरा

अस्पताल अधीक्षक डॉ. के.के. सिंह से की मुलाकात।

वार्ड, ट्रॉमा सेंटर और विभिन्न विभागों की स्थिति का किया अवलोकन, मरीजों व परिजनों से बातचीत कर जानी समस्याएं।
अस्पताल के आउटसोर्सिंग कर्मियों ने बताया कि नर्सों को 2 माह, कंप्यूटर ऑपरेटरों को 5 माह, सुरक्षा गार्डों को 7 माह और वार्ड बॉयों को 9 माह से वेतन/मानदेय नहीं मिला है।
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
हजारीबाग जिले के सदर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने शुक्रवार को शेख भिखारी मेडिकल अस्पताल का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशासनिक व्यवस्थाओं तथा कर्मचारियों की समस्याओं का विस्तृत जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल अधीक्षक डॉ. के.के. सिंह से मुलाकात कर अस्पताल में व्याप्त कमियों, मरीजों को हो रही परेशानियों और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तार से चर्चा किया। मुन्ना सिंह ने कहा कि सदर अस्पताल प्रतिदिन हजारों गरीब, जरूरतमंद और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की उम्मीदों का केंद्र है। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त रहना अत्यंत आवश्यक है। अस्पताल प्रशासन मरीजों को समय पर इलाज, दवाइयां, जांच और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही अस्पताल परिसर में मौजूद विभिन्न समस्याओं को शीघ्र दूर कर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने पर जोर दिया। जबकि अस्पताल अधीक्षक डॉ. के.के. सिंह ने उन्हें आश्वस्त करते हुए बताया कि जिन समस्याओं की जानकारी उन्हें मिली थी, उनमें से कई का तत्काल समाधान कर दिया गया है तथा अन्य समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है और आने वाले दिनों में व्यवस्थाओं में और सुधार देखने को मिलेगा। निरीक्षण के दौरान मुन्ना सिंह ने विभिन्न वार्डों की स्थिति का अवलोकन किया तथा मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। कई लोगों ने अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार और कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याओं की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराया। इस पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनहित से जुड़े इन मुद्दों को संबंधित विभागों और सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके बाद पूर्व प्रत्याशी ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, जहां उन्होंने वार्ड बॉयों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाकात किया। उल्लेखनीय है कि गुरुवार की रात ट्रॉमा सेंटर में मरीज के परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों के बीच हुए विवाद एवं मारपीट की घटना के बाद वार्ड बॉय आक्रोशित होकर हड़ताल पर चले गए थे। हड़ताल के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा था और मरीजों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कर्मचारियों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं और नाराजगी के कारणों को गंभीरता से सुना। कर्मचारियों ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उन्हें कई बार असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस पर पूर्व प्रत्याशी ने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अस्पताल में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनकी सुरक्षा तथा सम्मान के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए वे स्वयं प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से बातचीत करेंगे। उनके आश्वासन के बाद वार्ड बॉयों ने अपनी हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया और पुनः कार्य पर लौट आए, जिससे अस्पताल की सेवाएं सामान्य हो सकीं। इस दौरान अस्पताल में कार्यरत संविदा नर्सों, वार्ड बॉयों, सुरक्षा गार्डों तथा कंप्यूटर ऑपरेटरों ने भी अपनी गंभीर समस्याएं उनके समक्ष रखीं। कर्मचारियों ने बताया कि कई महीनों से वेतन भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। संविदा नर्सों ने कहा कि उन्हें पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। वहीं वार्ड बॉयों ने बताया कि उनका नौ माह से वेतन लंबित है। सुरक्षा गार्डों ने सात माह से वेतन नहीं मिलने की बात कही जबकि कंप्यूटर ऑपरेटरों ने बताया कि उन्हें पिछले पांच माह से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने कहा कि वे सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में लगातार मरीजों की सेवा कर रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से उनके परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। कई कर्मचारियों ने बताया कि घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। सिंह ने अस्पताल अधीक्षक से कहा कि जो कर्मचारी दिन-रात अस्पताल में रहकर मरीजों की सेवा कर रहे हैं, उन्हें समय पर वेतन और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों की उपेक्षा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे आउटसोर्सिंग कंपनी के संचालकों, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत कर सभी लंबित वेतन का भुगतान जल्द कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के नेतृत्व में राज्य के विकास तथा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 24×7 कार्य कर रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचें। अस्पतालों की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने तथा स्वास्थ्यकर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का भी जल्द समाधान होगा और स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में भी ठोस पहल की जाएगी। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण देना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। जनता की समस्याओं के समाधान और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि अस्पताल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सरकार के समन्वित प्रयासों से जल्द ही अस्पताल की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार होगा तथा मरीजों और कर्मचारियों दोनों को इसका लाभ मिलेगा। उनके हस्तक्षेप के बाद कर्मचारियों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला तथा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पुनः सामान्य रूप से संचालित होने लगीं।
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