गाजियाबाद
ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में लोनी तहसील में अनिश्चितकालीन हड़ताल
आज से न्यायिक व पंजीकरण कार्य ठप करने की घोषणा

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद : निबन्धन विभाग द्वारा निजी संस्थाओं के माध्यम से दस्तावेजों के पंजीकरण संबंधी जारी आदेश के विरोध में लोनी तहसील बार एसोसिएशन एवं उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक संघ ने संयुक्त रूप से बड़ा निर्णय लिया है। बुधवार को आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 11 जून 2026 से सभी अधिवक्ता न्यायिक एवं पंजीकरण कार्य से पूर्णतः विरत रहेंगे तथा यह हड़ताल अनिश्चितकालीन समय तक जारी रहेगी।
लोनी तहसील बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी की आवश्यक बैठक अध्यक्ष जगदीश प्रसाद शर्मा (राकेश) एडवोकेट की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में निबन्धन विभाग द्वारा जारी पत्रांक संख्या 2523/ई-पंजीकरण/शि०का०लख०/2026 दिनांक 04 जून 2026 पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प वेंडरों एवं अन्य संबंधित लोगों ने आदेश का कड़ा विरोध जताया।
“रोजगार पर पड़ेगा सीधा असर”
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यदि निजी संस्थाओं के माध्यम से दस्तावेजों का पंजीकरण शुरू किया गया तो तहसीलों में वर्षों से कार्य कर रहे अधिवक्ता, बैनामा लेखक, स्टाम्प विक्रेता, कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं मुंशी बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन का यह निर्णय पारंपरिक व्यवस्था को समाप्त कर निजीकरण को बढ़ावा देने वाला है।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि तहसील परिसर में प्रतिदिन सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी इन कार्यों पर निर्भर करती है। ऐसे में यह आदेश लागू होने से हजारों लोगों के सामने आर्थिक व रोजगार संकट खड़ा हो सकता है।
आम जनता को भी होगी भारी परेशानी
हड़ताल के चलते गुरुवार से लोनी तहसील में न्यायिक एवं पंजीकरण कार्य पूरी तरह प्रभावित रहेगा। बैनामा, रजिस्ट्री, शपथ पत्र, वसीयत, किरायानामा, जमीन खरीद-फरोख्त और अन्य कानूनी कार्यों के लिए आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
तहसील में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ेंगे। कई लोगों की जमीन रजिस्ट्री, बैंक लोन, संपत्ति हस्तांतरण और कोर्ट से जुड़े जरूरी कार्य अटक सकते हैं। आम नागरिकों का कहना है कि यदि हड़ताल लंबी चली तो सरकार को आर्थिक नुकसान के साथ लोगों के समय की भी बर्बादी होगी।
मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक शासन विवादित आदेश को वापस नहीं लेता और अधिवक्ताओं व दस्तावेज लेखकों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सभी अधिवक्ता अपने-अपने चैम्बरों के शटर बंद रखेंगे और किसी प्रकार का न्यायिक या पंजीकरण कार्य नहीं करेंगे।



