गाजियाबाद
जल भराव व निर्माण कार्य में देरी से लोनी बेहाल
सड़क, नाले और सीवर कार्यो ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

25 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना सुस्त, अधूरे सीवर कार्य से जाम और जलभराव की समस्या गहराई
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद : लोनी में दिल्ली-सहारनपुर मार्ग, नाला निर्माण और सीवर लाइन बिछाने का कार्य योजनाहीन तरीके से किए जाने के कारण क्षेत्र के लाखों लोगों का जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। निर्माण कार्य की धीमी गति, आधी अधूरी व्यवस्थाएं और यातायात प्रबंधन के अभाव ने भीषण ट्रैफिक जाम, धूल, जलभराव और दुर्घटनाओं के खतरे को बढ़ा दिया है।
वर्षों के इंतजार के बाद शुरू हुई लगभग 25 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना से लोगों को बेहतर यातायात होने की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति इन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। कई महीनों से सड़क और नाला निर्माण कछुआ गति से चल रहा है, जबकि जल निगम द्वारा सीवर लाइन डालने का कार्य भी अनेक स्थानों पर अधूरा पड़ा है। इससे सड़कें जगह-जगह खोदी हुई हैं और आवागमन लगातार बाधित हो रहा है।
निर्माण स्थलों पर यातायात प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से सड़कों पर लंबा जाम लग रहा है। कई स्थानों पर सड़क निर्माण टुकड़ों में किया जा रहा है, खुले गड्ढे और बिना सुरक्षा घेराबंदी के निर्माण स्थल दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। बारिश के दौरान अधूरे नाले और सड़क निर्माण के कारण पानी सड़क पर भर जाता है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है।
लोनी बॉर्डर, शिव विहार मेट्रो स्टेशन, बलराज नगर और लोनी तिराहा ,पाभी से पुस्ता चौकी सहित प्रमुख स्थानों पर प्रतिदिन घंटों तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। इससे दिल्ली, नोएडा और अन्य क्षेत्रों में नौकरी या व्यवसाय के लिए आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दिल्ली के स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए भी समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना कठिन हो गया है।
अनियमितताओं पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य मानसून से पहले पूरा करने के दावे किए गए थे, लेकिन आज भी अधिकांश कार्य अधूरे हैं। निर्माण सामग्री और मलबा सड़क किनारे बेतरतीब ढंग से पड़ा रहता है, जिससे यातायात और अधिक प्रभावित हो रहा है। जाम से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों के स्पष्ट संकेत भी कहीं दिखाई नहीं देते।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य सुव्यवस्थित योजना, चरणबद्ध क्रियान्वयन और प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन के साथ किया जाता तो आम लोगों को इतनी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता।
सबसे चिंताजनक स्थिति आपातकालीन सेवाओं की है। मार्ग पर लंबे जाम के कारण फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसे आवश्यक वाहनों को समय पर घटनास्थल या अस्पताल तक पहुंचने में गंभीर बाधा आती है, जिससे आपात स्थिति में जनहानि का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभागों से निर्माण कार्य में तेजी लाने, यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाने तथा अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा कराने की मांग की है।



