
स्टेशन रोड पर पंजाब नेशनल बैंक के सामने स्थित नजूल भूमि का मामला; पत्रकार प्रमोद कुमार बबेले ने सौंपा शिकायती पत्र, राजस्व अभिलेखों की जांच की उठाई मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। शहर के सबसे व्यस्त और व्यावसायिक क्षेत्र स्टेशन रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने पंडित परमानंद की प्रतिमा के पास स्थित अरबों रुपये मूल्य की कथित सरकारी नजूल भूमि पर अवैध कब्जे और विवादित रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। इस संबंध में स्थानीय पत्रकार प्रमोद कुमार बबेले ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, राजस्व अभिलेखों की पड़ताल करने तथा सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। शिकायती पत्र के अनुसार संबंधित भूमि मूल रूप से आराजी संख्या 1893 (पूर्व संख्या 1930) की नजूल संपत्ति है, जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी झांसी द्वारा 5 दिसंबर 1935 को श्रीमती बाजदा बेगम बेबा मसूक अली के नाम दर्ज किया गया था। वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान बाजदा बेगम के पाकिस्तान चले जाने के बाद उनकी सम्पूर्ण संपत्ति भारत सरकार के अधीन आ गई। इस परिसर में दो बंगले बने हुए थे तथा कुछ भूमि खाली पड़ी थी। पत्र में दावा किया गया है कि बाद में भारत सरकार ने इस संपत्ति का तीन भागों में विभाजन किया। पहले चरण में एक बंगला एवं उससे संबंधित भूमि की नीलामी की गई, जिसे डॉ. ताराचंद चौधरी ने खरीदा। हालांकि बाद में 4 फरवरी 1961 को यह नीलामी निरस्त कर दी गई और राजस्व अभिलेखों से उनका नाम भी हटा दिया गया। इसके बाद 1 अप्रैल 1961 को दोबारा नीलामी कर वाई. आर. पुरी को लगभग 1775 वर्ग फीट भूमि सहित बंगला आवंटित किया गया, जिसका नाम 2 मई 1963 को भारत सरकार के आदेश पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया। बाद में वाई. आर. पुरी ने उक्त संपत्ति डॉ. ताराचंद चौधरी के नाम विक्रय कर दी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉ. ताराचंद चौधरी के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारियों ने निर्धारित सीमा से अधिक सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया। आगे यह भी आरोप है कि डॉ. अनुपम चौधरी की पत्नी ने कथित रूप से विवादित भूमि का एक हिस्सा पूर्व बसपा विधायक स्वर्गीय रामकुमार तिवारी के पुत्र निखिल तिवारी के नाम रजिस्ट्री कर दिया, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त भूमि सरकारी नजूल संपत्ति है और उसकी बिक्री का अधिकार किसी निजी व्यक्ति को नहीं था। पत्रकार प्रमोद कुमार बबेले ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पुराने राजस्व अभिलेखों, नीलामी अभिलेखों एवं स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जाए। यदि भूमि पर अवैध कब्जा अथवा नियम विरुद्ध रजिस्ट्री की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए। यह मामला शहर के सबसे महंगे व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सरकारी संपत्ति को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।



