गाजियाबाद

लोनी की दलित व मलिन बस्तियों के विकास कार्यों की जांच और सोशल ऑडिट कराने की मांग

डीएम को सौंपा जनहित प्रार्थना पत्र

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। लोनी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार ने लोनी नगर पालिका परिषद क्षेत्र की अनुसूचित जाति बहुल बस्तियों और मलिन बस्तियों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव, विकास कार्यों में पारदर्शिता तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी गाजियाबाद को अपना जनहित मांगों से संबंधित प्रार्थना पत्र सौंपा । उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के परियोजना अधिकारी तथा नगर पालिका परिषद लोनी के अधिशासी अधिकारी को भी भेजी गई है।
जिसमें कहा गया है कि ग्राम सादुल्लाबाद, सलाहनगर, मिलक चमारान, विकास नगर-इलायचीपुर, खानपुर, हरमपुर बस्ती, बाग राणप, लोनी जाटवान मोहल्ला, कच्चा बलराम नगर, दुगरावली, इंद्रापुरी ई-ब्लॉक, पंचवटी, राजीव गार्डन, लक्ष्मी गार्डन, बंथला, बेहटा हाजीपुर, राजनगर सहित अनेक अनुसूचित जाति बहुल और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में आज भी सड़क, नाली, सीवर, स्वच्छ पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पार्क, सामुदायिक भवन, सार्वजनिक शौचालय, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
शिकायती जनहित पत्र में आरोप लगाया गया है कि कई क्षेत्रों में जलभराव, अवरुद्ध सीवर, खुले नालों और दूषित जल निकासी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है।
सुरेन्द्र कुमार ने मांग की है कि नगरपालिका परिषद के वर्ष 2015 से अब तक अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों और मलिन बस्तियों में कराए गए विकास कार्यों की तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीय जांच कराई जाए। साथ ही स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीएसपी), अनुसूचित जाति उपयोजना, डूडा तथा अन्य सरकारी योजनाओं के तहत प्राप्त धनराशि और उसके व्यय का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) कराया जाए।
प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार या जनप्रतिनिधि की भूमिका वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार या धन के दुरुपयोग में सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा सभी अधिसूचित एवं अनधिसूचित मलिन बस्तियों का नया सर्वे कराने, प्रत्येक वार्ड में संयुक्त निगरानी समिति गठित करने, स्वीकृत विकास परियोजनाओं और व्यय का विवरण सार्वजनिक करने, उपेक्षित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर सड़क, सीवर, जल निकासी, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पार्क, पुस्तकालय, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक संसाधन केंद्र विकसित करने तथा दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार करने की भी मांग की गई है।
प्रार्थना पत्र में जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा की गई कार्रवाई से प्रार्थी को अवगत कराने का अनुरोध किया गया है।
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