गाजियाबाद

भाजपा से जुड़े नेताओं पर डीएलएफ लोनी बिजलीघर में हंगामे का आरोप

एफआईआर के बाद भी कार्रवाई नहीं, पुलिस की भूमिका मूकदर्शक की बनी 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। डीएलएफ अंकुर विहार थाना क्षेत्र स्थित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र, डीएलएफ लोनी में हंगामा, सरकारी कार्य में बाधा और बिजली आपूर्ति ठप कराने के आरोप में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। इसके बावजूद नामजद आरोपितों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से विद्युत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। मामले को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अवर अभियंता सुनील कुमार द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार 12 जुलाई को कुछ स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में करीब 100 से 150 लोग बिना पूर्व अनुमति बिजलीघर पहुंच गए। आरोप है कि भीड़ ने कर्मचारियों के साथ अभद्रता की, ड्यूटी पर तैनात एसएसओ शाहनवाज के साथ मारपीट की तथा धार्मिक टिप्पणी करते हुए धमकियां दीं। शिकायत के मुताबिक भीड़ जबरन कंट्रोल रूम में घुस गई और चालू 11 केवी मशीनों से छेड़छाड़ की, जिससे बड़ा विद्युत हादसा होने की आशंका पैदा हो गई थी।
विद्युत विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का आरोप है कि दबाव बनाकर सभी फीडर बंद करा दिए गए और बिजलीघर के कंट्रोल रूम पर ताला लगा दिया गया। इसके चलते करीब 26 हजार उपभोक्ताओं की बिजली लगभग छह घंटे तक बाधित रही। विभाग का कहना है कि इस दौरान दोनों 10 एमवीए पावर ट्रांसफार्मरों पर अत्यधिक लोड पड़ने से उन्हें नुकसान पहुंचने का खतरा उत्पन्न हो गया था, जिससे विभाग को भारी आर्थिक क्षति हो सकती थी।
इन लोगों को किया गया नामजद, 100-150 अज्ञात भी शामिल
पुलिस ने अवर अभियंता की तहरीर पर आशीष झा, ओमप्रकाश पांडे, गोविंद शर्मा, विजय कुमार, अशोक कुमार, अमरजीत, धर्मबीर और प्रदीप सहित 100 से 150 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट, अभद्रता, बिजली आपूर्ति बाधित करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि दिन में हुए हंगामे के बाद देर रात कुछ अन्य लोग भी बिजलीघर पहुंचे और दोबारा हंगामा किया। अवर अभियंता ने पूरी घटना की वीडियो सीडी सहित अन्य साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराते हुए आरोपितों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
नामजद लोगों के खिलाफ कार्यवाही ना होने पर विधुत विभाग के लोग उठा रहे हैं सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एफआईआर दर्ज होने और नामजद आरोपितों के साथ वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद अब  पुलिस ने कोई कार्रवाई  नहीं की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे आरोप किसी आम नागरिक पर लगे होते तो पुलिस तत्काल गिरफ्तारी करती, लेकिन राजनीतिक प्रभाव वाले आरोपितों के मामले में कार्रवाई की गति बेहद धीमी दिखाई दे रही है।
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