बागपत

एशिया में बढ़ते परमाणु जोखिम और चरमपंथ पर वैश्विक चिंता

जिनेवा सम्मेलन में विशेषज्ञों ने मजबूत संस्थानों और क्षेत्रीय सहयोग पर दिया जोर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत।  एशिया में बढ़ती परमाणु क्षमताओं, क्षेत्रीय तनाव और चरमपंथ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई है। जिनेवा में आयोजित एक सम्मेलन में लेबनानी पत्रकार एवं शोधकर्ता रेने नाबा की पुस्तक The Nuclearization of Asia: From Nuclearization to Asia’s Rise पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति या परमाणु हथियारों पर नहीं, बल्कि मजबूत संस्थाओं, जिम्मेदार शासन और सामाजिक स्थिरता पर भी निर्भर करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे परमाणु संपन्न देशों के बीच मौजूद रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय विवाद किसी भी संकट को गंभीर रूप दे सकते हैं। पुस्तक में यह भी कहा गया है कि चरमपंथ और उग्रवादी नेटवर्क सुरक्षा व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकते हैं। पाकिस्तान से जुड़े कुछ ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख लेखक के विश्लेषण के रूप में किया गया है।
विशेषज्ञों ने साइबर हमलों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), दुष्प्रचार और नई सैन्य तकनीकों को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का प्रमुख कारण बताया। उनका मानना है कि परमाणु जोखिम कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, हथियार नियंत्रण, विश्वास निर्माण और आतंकवाद-रोधी प्रयासों को मजबूत करना आवश्यक है।
सम्मेलन का निष्कर्ष रहा कि स्थायी शांति केवल सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि जिम्मेदार नेतृत्व, मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं, सामाजिक सौहार्द और वैश्विक सहयोग से ही सुनिश्चित की जा सकती है।
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