स्मार्ट खेती की दिशा में एमआईईटी की बड़ी पहल
आईआईटी (बीएचयू) के सहयोग से राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

देश-विदेश के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव, सेंसर-टू-क्लाउड तकनीक और एआई आधारित कृषि समाधानों पर दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मेरठ। कृषि क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने और भविष्य की स्मार्ट एवं डेटा-आधारित कृषि (प्रिसिजन एग्रीकल्चर) के लिए विशेषज्ञ तैयार करने की दिशा में मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) ने महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग द्वारा इंटरडिसिप्लिनरी डेटा एनालिटिक्स एंड प्रेडिक्टिव टेक्नोलॉजी (आई-डीएपीटी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू), वाराणसी के सहयोग से “इंटीग्रेटेड सेंसर-टू-क्लाउड सॉल्यूशंस: नेक्स्ट-जनरेशन प्रिसिजन एग्रीकल्चर” विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर फिजिकल सिस्टम्स (एनएम-आईसीपीएस) के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 31 जुलाई तक चलेगा। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए संकाय सदस्य, वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ, शोधार्थी, तकनीकी अधिकारी तथा स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को कृषि क्षेत्र में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एम्बेडेड सिस्टम, सेंसर टेक्नोलॉजी, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक एवं शोध-आधारित अनुप्रयोगों से परिचित कराना है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एंड-टू-एंड सेंसर-टू-क्लाउड आर्किटेक्चर, मल्टी-सेंसर एम्बेडेड सिस्टम डिजाइन, औद्योगिक संचार प्रोटोकॉल, सुरक्षित क्लाउड कनेक्टिविटी, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, स्मार्ट डैशबोर्ड डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स तथा एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली के माध्यम से आधुनिक कृषि प्रबंधन की नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
संस्थान के चेयरमैन विष्णु शरण एवं वाइस चेयरमैन गौरव अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में साइबर-फिजिकल सिस्टम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट कृषि तकनीकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भविष्य की कृषि डेटा आधारित निर्णय, रियल-टाइम निगरानी और बुद्धिमान स्वचालित प्रणालियों पर आधारित होगी तथा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को शोध, नवाचार, स्टार्टअप और उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करेंगे।
कार्यक्रम की विशेषता देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों के विशेषज्ञ व्याख्यान रहे। मुख्य वक्ता के रूप में विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर), भारत सरकार के वैज्ञानिक ‘ई’ श्री पुरुषोत्तम कुमार ने साइबर-फिजिकल सिस्टम और तकनीकी नवाचारों पर अपने विचार रखे। अंतरराष्ट्रीय मुख्य वक्ता के रूप में किन्जो विश्वविद्यालय, जापान के प्रो. कानीचिरा मात्सुमुरा ने स्मार्ट सेंसर एवं वैश्विक अनुसंधान के नवीन आयामों पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञ व्याख्यानों की श्रृंखला में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के सेंटर फॉर सेंसर्स, इंस्ट्रूमेंटेशन एंड साइबर फिजिकल सिस्टम इंजीनियरिंग (SeNSE) के संकाय सदस्य एवं इंट्रिंसिक लैब के निदेशक प्रो. संतोष शिवसुब्रमणि, नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी), नई दिल्ली के प्रो. (डॉ.) राजवीर सिंह यादववंशी, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) उदय प्रताप शाही, मृदा एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. विकास सिंह, जेएसएस विश्वविद्यालय, नोएडा के प्रो. (डॉ.) अमित आहूजा, केआईईटी विश्वविद्यालय, गाजियाबाद के प्रो. नीरज कुमार तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों को सेंसर टेक्नोलॉजी, स्मार्ट एग्रीकल्चर, डेटा एनालिटिक्स, एआई आधारित निर्णय प्रणाली, कृषि नवाचार तथा उद्योगोन्मुख अनुसंधान के विभिन्न आयामों से अवगत कराया।
कार्यक्रम के संरक्षक कैंपस डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) एस.के. सिंह हैं, जबकि डीन एकेडमिक्स प्रो. (डॉ.) संजीव सिंह सह-संरक्षक के रूप में मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ए.के. सिंह एवं प्रो. (डॉ.) नेहा मित्तल कर रहे हैं, जबकि प्रो. (डॉ.) प्रियंक शर्मा और डॉ. प्रशांत कुमार गुप्ता सह-संयोजक हैं।
आयोजकों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को केवल आधुनिक तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि शोध, नवाचार, स्टार्टअप और उद्योगोन्मुख समाधान विकसित करने की क्षमता भी प्रदान करेगा। प्रशिक्षण के समापन पर निर्धारित उपस्थिति मानदंड पूरा करने वाले प्रतिभागियों को आई-डीएपीटी, आईआईटी (बीएचयू) एवं एमआईईटी मेरठ द्वारा संयुक्त प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम स्मार्ट कृषि, डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नवाचारों को नई गति देने के साथ भारत में तकनीक-संचालित, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख कृषि व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।



