
पटना। प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी ने बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा के 35 साल के गढ़ को ध्वस्त कर अपनी पहली ऐतिहासिक चुनावी जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को 18,953 मतों के बड़े अंतर से हराकर बिहार की राजनीति में एक नए राजनीतिक दल के उदय का संकेत दिया है। यह जीत प्रशांत किशोर की जमीनी स्तर की रणनीति और रोजगार, शिक्षा व सुशासन पर केंद्रित अभियान की सफलता का प्रमाण है।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की। इस सीट को भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता था। किशोर ने विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के नीरज कुमार को 18,000 से ज्यादा वोटों से हराया। इस हार से भाजपा को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि यह सीट पार्टी नेता नितिन नवीन का गढ़ रही है। सोमवार को किशोर ने अपनी पार्टी की पहली चुनावी जीत हासिल करके इतिहास रच दिया। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को हराया और बिहार में उसके सबसे मजबूत गढ़ों में से एक पर पार्टी के लगातार 35 साल के कब्जे को खत्म कर दिया।
किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 18,953 वोटों से हराया। उन्हें 63,203 वोट मिले, जबकि सिन्हा को 44,250 वोट मिले। वहीं RJD की रेखा गुप्ता 14,085 वोटों के साथ काफी पीछे तीसरे स्थान पर रहीं। शुरूआती रुझानों में बढ़त बनाने के बाद किशोर ने अपनी बढ़त लगातार बढ़ाई और कुल 36 राउंड की गिनती में से 15वें राउंड तक उनकी जीत लगभग तय हो गई थी। बांकीपुर उपचुनाव की जरूरत तब पड़ी जब भाजपा नेता नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हो गई; नबीन बाद में राज्यसभा के लिए चुने गए थे।
यह जीत जन सुराज प्रमुख की महीनों की मेहनत का नतीजा थी। उन्होंने इखढ और RJD के जोर-शोर से चुनाव प्रचार शुरू करने से लगभग दो महीने पहले ही अपना अभियान शुरू कर दिया था। इस दौरान, किशोर ने जनसभाएं कीं, घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया और पूरे चुनाव क्षेत्र में बूथ-स्तर का संगठन खड़ा किया, जिससे उनकी नई पार्टी को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त मिल गई। पूरे कैंपेन के दौरान, किशोर ने उपचुनाव को “सम्राट चौधरी सरकार पर जनमत संग्रह के तौर पर पेश किया। उनका कैंपेन मुख्य रूप से रोजगार, शिक्षा और गवर्नेंस पर केंद्रित था, जिसमें पहली बार वोट देने वालों और वोटर्स पर खास जोर दिया गया।
वहीं, बीजेपी ने इस मुकाबले को प्रतिष्ठा की लड़ाई माना और सीट बचाने के लिए करीब 40 स्टार प्रचारकों और हजारों पार्टी कार्यकतार्ओं को मैदान में उतारा। चुनाव के आखिरी चरण में कई वरिष्ठ नेताओं ने बांकीपुर में जोर-शोर से प्रचार किया। अपनी जीत पक्की होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए किशोर ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता बांकीपुर के लोगों के भरोसे का सम्मान करना है।
उन्होंने कहा कि इस जीत के बाद हमारी पहली प्राथमिकता बांकीपुर के लोगों के आशीर्वाद और भरोसे का सम्मान करना है। हम बांकीपुर को बेहतर बनाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। अगले दो-तीन महीनों में आपको वे बदलाव दिखने लगेंगे। उम्मीदों को संतुलित करते हुए किशोर ने कहा कि उनके विधायक चुने जाने से बाकीपुर रातों-रात बेंगलुरु नहीं बन जाएगा, लेकिन उन्होंने निवासियों को भरोसा दिलाया कि अगले कुछ महीनों में ही साफ तौर पर सुधार दिखने लगेंगे।



