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राम मंदिर दान का होगा हिसाब

SIT को सुप्रीम कोर्ट की फटकार: रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी की जांच कर रही एसआईटी को जांच में तेजी लाने और उसे सही नतीजे तक पहुंचाने को कहा। कोर्ट ने जांच की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए याचिकाकतार्ओं के सुझावों पर निष्पक्षता से विचार करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी की जांच कर रही कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम एसआईटी से अपनी जांच में तेजी लाने और दो सप्ताह में सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने एसआईटी को दान में कथित चोरी के मामले में अब तक हुई जांच की प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश दिया। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट दान प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए नए निर्देश जारी कर सकता है।
याचिकाकतार्ओं के सुझावों पर निष्पक्षता से विचार करने का निर्देश
पीठ ने एसआईटी से कहा कि जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग याचिकाकतार्ओं की ओर से दिए गए सुझावों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि जांच में किसी भी तरह की कमी न रहे और पूरे मामले की पड़ताल प्रभावी तरीके से आगे बढ़े।
रिपोर्ट के बाद दान प्रबंधन पर आ सकते हैं नए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट देखने के बाद वह राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले दान के प्रबंधन में सुधार के लिए जरूरी निर्देश जारी कर सकता है। यानी कोर्ट की नजर केवल कथित हेराफेरी की जांच पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर भी है।
27 जुलाई को चार सदस्यीय एसआईटी के गठन का लिया था संज्ञान
इससे पहले 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी की जांच के लिए कॠढ किरण एस. की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय एसआईटी का संज्ञान लिया था। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच टीम में एक फोरेंसिक आॅडिटर को शामिल करने के लिए भी कहा था।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर कोर्ट ने दिया था जोर
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसमें ‘सुधारात्मक कदम उठाने होंगे’। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि दान के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
20 जुलाई को एसआईटी गठित करने की संभावना पर मांगी थी जानकारी
20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए रकळ गठित करने की क्या संभावना है। कोर्ट की इस पहल के बाद मामले की जांच को लेकर राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई आगे बढ़ी और विशेष जांच टीम का गठन किया गया।
13 जुलाई को पुलिस से मांगी थी स्टेटस रिपोर्ट
इससे पहले 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। साथ ही दान की कथित चोरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस भी जारी किया था।
दान प्रबंधन में गड़बड़ी के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ता
राम मंदिर में दान के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद फखऊ सांसद सुधाकर सिंह समेत कई याचिकाकतार्ओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिकाकतार्ओं ने मामले की जांच उइक से कराने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड का फोरेंसिक आॅडिट कराने की मांग की है। अब सुप्रीम कोर्ट की निगाह रकळ की जांच रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे के कदम तय किए जा सकते हैं।

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