
नई दिल्ली। राहुल गांधी ने दिल्ली में ‘हरा भरा स्वराज’ कार्यक्रम में आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कोई एक समूह 1.5 अरब भारतीयों की सच्चाई जानने का दावा नहीं कर सकता। राहुल ने स्वराज के लिए शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षा, वित्तीय व्यवस्था और मजबूत पंचायती राज की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि वह भारत का हिस्सा है।
दिल्ली में हरा भरा स्वराज: राजीव गांधी के विजन को श्रद्धांजलिह्णकार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी एक समूह या व्यक्ति को यह मानने का अधिकार नहीं है कि वह देश की 1.5 अरब आबादी की सच्चाई जानता है। राहुल गांधी ने कहा यही आरएसएस के साथ मेरी समस्या है। आरएसएस ने तय कर लिया है कि वह 1.5 अरब लोगों की सच्चाई जानता है। मैं कहता हूं कि केवल 1.5 अरब लोग ही अपनी सच्चाई जान सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह यह मान लें कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की सच्चाई जानते हैं तो यह गलत होगा, क्योंकि उन्होंने उस व्यक्ति के अनुभवों और परिस्थितियों को नहीं देखा है।
भारत की असली वैचारिक लड़ाई क्या है?
राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में वैचारिक लड़ाई सिर्फ पर्यावरण, राजनीति या स्वतंत्र मीडिया जैसे मुद्दों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या कोई समूह यह तय कर सकता है कि देश के हर व्यक्ति की सच्चाई वही जानता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छात्रों से जुड़े एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मतलब यह संदेश देना है कि “मैं सब कुछ जानता हूं, आप कुछ नहीं जानते।”
राहुल गांधी ने कहा कि जब छात्रों ने विरोध किया तो मोहन भागवत की ओर से भी छात्रों पर हमला नहीं करने की बात कही गई, लेकिन उनके अनुसार छात्रों पर लगातार हमला इसलिए हो रहा है क्योंकि कुछ लोग मानते हैं कि वे उनकी सच्चाई जानते हैं।
राहुल गांधी ने ‘स्वराज’ को लेकर क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि अगर देश के हर कारोबार का मालिक एक ही व्यक्ति हो तो बड़ी आबादी के लिए स्वराज संभव नहीं है। उन्होंने कहा “अगर एक व्यक्ति इस देश के हर एक कारोबार का मालिक है तो भारतीय लोगों की बड़ी आबादी के लिए स्वराज की कोई संभावना नहीं है।” राहुल गांधी ने कहा कि देश में कुछ लोगों के पास एयरपोर्ट, बंदरगाह और कंपनियां होनी चाहिए, जबकि दूसरे लोग ऐसे नौकरशाह होने चाहिए जो अपनी बात स्वतंत्र रूप से रख सकें और किसी कारोबारी के प्रभाव में आकर काम करने के लिए मजबूर न हों।



