सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा होगी मजबूत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली l महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को उभरते हवाई खतरों (AERIAL THREATS) से सुरक्षित रखने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में, CISF मुख्यालय में CISF और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य देश के सामरिक संस्थानों की सुरक्षा को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना है।
समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रमुख बिंदु:
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: RTC बहरोड़ को ‘ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन सिस्टम’ के उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में विकसित किया जाएगा।
सुरक्षा मानक: महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs) और डिप्लॉयमेंट फ्रेमवर्क तैयार करना।
स्वदेशी फोरेंसिक टूल्स: अनधिकृत या ‘रोग ड्रोन’ (Rogue Drones) की जांच और विश्लेषण के लिए स्वदेशी तकनीकी टूल्स का विकास।
संयुक्त अभ्यास: सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए जॉइंट ड्रिल्स और रेड-टेमिंग एक्सरसाइज का आयोजन।
स्टार्टअप्स को बढ़ावा: भारतीय ड्रोन स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ मिलकर क्षमता निर्माण और एप्लाइड रिसर्च पर जोर।
वर्तमान सुरक्षा स्थिति और आंकड़े:
सुरक्षा दायरा: CISF वर्तमान में देश भर के 370 से अधिक अति-संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों (जैसे हवाई अड्डे, परमाणु संयंत्र और मेट्रो) की सुरक्षा संभाल रहा है।
प्रशिक्षण: बल के 3,000 से अधिक कर्मियों को विशेष रूप से ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
सक्रिय उपयोग: देश की लगभग 80 सीआईएसएफ यूनिट्स में वर्तमान में ड्रोन तकनीक का सक्रिय उपयोग किया जा रहा है।
यह रणनीतिक साझेदारी न केवल आधुनिक हवाई और सुरक्षा खतरों से निपटने में मददगार साबित होगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी तकनीकी नवाचार को भी एक नई गति देगी।



