असम
असम के दरंग जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई गई
राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य बने प्रमुख अतिथि।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के दरंग जिले के कुमारपारा, देउमरणै में स्थित श्री शियाला वैष्णव देवालय सत्र में शुक्रवार को भक्तिमय और सांस्कृतिक उत्साह के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने समारोह की गरिमा बढ़ाई और वैष्णव परंपरा व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। संपूर्ण दिन चले कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः प्रसंग , परिसर स्वच्छता, भागवत पाठ, धर्मध्वजा फहराना और बत्ती प्रज्वलन उद्घाटन से हुई। इसके बाद बरगीत का गायन, श्रवण-आरचना और वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में भक्तों और स्थानीय लोगों ने राज्यपाल का हार्दिक स्वागत किया। राज्यपाल ने सत्र का निरीक्षण कर भगवान के समक्ष सेवाभावी पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया तथा वृक्षारोपण में भाग लेकर कार्यक्रम में औपचारिक रूप से शामिल हुए। अपने संक्षिप्त परंतु प्रभावशाली संबोधन में वे बोले कि जन्माष्टमी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और आदर्शों से जुड़े मानवीय मूल्यों—दया, न्याय, भ्रातृत्व और सहानुभूति—को आत्मसात करने का अवसर है। उन्होंने सभी से आत्मपरीक्षण करने और दैनिक जीवन में इन आदर्शों का पालन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सिपाझार विधानसभा के विधायक परमानंद राजवंशी ने स्थानीय वैष्णव परंपरा और सत्थ्र संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण व सामाजिक मेलजोल पर ज़ोर दिया। मीनपालन और पशुपालन विभाग की कैबिनेट मंत्री निलिमा देवी ने शियाला क्षेत्र के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए सत्थ्र और स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया और समुदाय से परम्परा के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। राज्यपाल ने शंकरदेव, मां कामाख्या और बीर लाचित बोरफोकन जैसे महान विभूतियों का स्मरण कर असम की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सौंपने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपने सांस्कृतिक श्रोतों से जुड़े रहते हुए प्रगतिशील और समृद्ध समाज के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।इस कार्यक्रम में दरंग जिला आयुक्त, सत्र अधिकारी, भक्त समुदाय, सत्थ्र प्रबंधन समिति के सदस्य, कलाकार और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद थे। जन्माष्टमी समारोह ने वैष्णव दर्शन की सास्वत प्रासंगिकता, सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक सौहार्द्य का संदेश दिया।



