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ट्रॉमा सेंटर में पत्रकार से कथित बदसलूकी
मरीज की शिकायत पर कवरेज करने पहुंचे अतुल दुबे ने डॉक्टर अम्बे शाह पर लगाए गंभीर आरोप

कॉलर पकड़ने, मोबाइल छीनने, मारपीट के प्रयास और धमकी की शिकायत
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली : जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मरीज की समस्या की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पत्रकार अतुल कुमार दुबे ने कोतवाली बैढ़न में शिकायत देकर डॉक्टर अम्बे शाह पर रास्ता रोकने, अभद्र व्यवहार करने, कॉलर पकड़ने, मारपीट का प्रयास करने, मोबाइल छीनने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के बाद पत्रकारों में आक्रोश है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
कवरेज करने पहुंचे थे, विवाद में घिर गए
शिकायत के मुताबिक, अतुल दुबे ट्रॉमा सेंटर में मरीज से जुड़ी शिकायत की कवरेज करने पहुंचे थे। कवरेज के बाद कथित तौर पर डॉक्टर अम्बे शाह ने उनका रास्ता रोक लिया। आरोप है कि बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि डॉक्टर ने पत्रकार के कॉलर पर हाथ लगाया और मोबाइल छीनने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता ने मारपीट की कोशिश और धमकी देने का आरोप भी लगाया है।
घटना के दौरान मौजूद लोगों द्वारा बीच-बचाव किए जाने की बात शिकायत में कही गई है। मामले की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन अस्पताल परिसर में पत्रकार के साथ कथित तौर पर हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
CCTV में कैद हुआ घटनाक्रम तो खुलेगा सच
पत्रकार अतुल दुबे ने शिकायत में अस्पताल परिसर के CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका कहना है कि घटना अस्पताल परिसर में हुई है और वहां लगे कैमरों में पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड होने की संभावना है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या CCTV फुटेज सुरक्षित रखी जाएगी?
यदि फुटेज उपलब्ध है तो जांच एजेंसी के लिए यह घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने लाने वाला महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है। इसलिए फुटेज के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो और उसे जांच का हिस्सा बनाया जाए, इसकी मांग की गई है।
खबर पसंद नहीं आई तो जवाब दें, हाथ उठाने का अधिकार किसने दिया?
पत्रकारिता का काम अस्पताल में मरीजों की परेशानी, व्यवस्था और जिम्मेदारों से जुड़े सवालों को सामने लाना है। किसी खबर या कवरेज पर आपत्ति हो सकती है, लेकिन उसका जवाब तथ्य और अधिकृत प्रक्रिया के माध्यम से दिया जाना चाहिए।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और अस्पताल में पारदर्शिता के सवाल से भी जुड़ जाएगा।
‘पैसे के चलते आपा खोने’ के आरोप पर भी उठे सवाल
घटना के बाद पत्रकारों में यह चर्चा भी है कि मरीजों की शिकायतों और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली खबरों को लेकर जिम्मेदारों का रवैया कैसा है। हालांकि किसी व्यक्ति पर भ्रष्टाचार या पैसे के प्रभाव में काम करने का आरोप बिना प्रमाण के तथ्य नहीं माना जा सकता, लेकिन घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
मामला अब शिकायत से आगे बढ़कर जांच की कसौटी पर है।
जनता का सवाल
अगर अस्पताल में मरीज की समस्या की खबर करने वाला पत्रकार ही सुरक्षित नहीं है, तो अपनी शिकायत लेकर आने वाला आम मरीज किस भरोसे के साथ अपनी आवाज उठाएगा?
अब निगाह पुलिस जांच, CCTV फुटेज और अस्पताल प्रबंधन की कार्रवाई पर है।


