
दिल्ली ।डूसू दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व का अहम मंच है। समय के साथ इसकी छात्र राजनीति का असर कैंपस से बाहर भी दिखाई दिया है। डूसू से जुड़े कई चेहरे आगे चलकर विधायक, सांसद, मंत्री और राजनीतिक संगठनों में अहम जिम्मेदारियों तक पहुंचे। आइए जानते हैं कि इस बार के चुनाव में क्या खास है?
दिल्ली विश्वविद्यालय में आज छात्र राजनीति का सबसे बड़ा चुनाव हो रहा है। डूसू यानी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में करीब 1.5 लाख छात्र अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान कर रहे हैं। कैंपस में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है और गुरुवार रात से 1,000 से 1,500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। 19 सितंबर को मतगणना होगी। छात्र सुरक्षा, आवास, हॉस्टल, कैंपस का बुनियादी ढांचा और छात्र कल्याण जैसे मुद्दे इस चुनाव में प्रमुख हैं।
ऐसे में आइए जानते हैं कि डूसू चुनाव क्या है? इसकी प्रक्रिया क्या होती है? इसमें कौन-कौन से पद होते हैं? इस बार के चुनाव में क्या खास है? डूसू चुनाव का इतिहास क्या रहा है? इस चुनाव से निकलकर किन चेहरो ने देश की सियासत में अपनी धाक जमाई?
डूसू चुनाव क्या है?
डूसू यानी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ विश्वविद्यालय के छात्रों का निर्वाचित प्रतिनिधि संगठन है। यह छात्रों के कल्याण, अधिकारों और कैंपस से जुड़े मुद्दों पर काम करता है। डूसू के केंद्रीय चुनाव में चार प्रमुख पदों के लिए मतदान होता है। योग्य छात्र इन पदों के लिए सीधे मतदान करते हैं। चुनाव का मूल सिद्धांत है एक छात्र, एक वोट।
चारों पदों की क्या जिम्मेदारी है?
अध्यक्ष डूसू का प्रमुख निर्वाचित पदाधिकारी होता है। वह छात्रों का प्रतिनिधित्व करता है और विश्वविद्यालय की अकादमिक तथा कार्यकारी परिषद की बैठकों में छात्रों की बात रखता है।
उपाध्यक्ष अध्यक्ष की सहायता करता है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में संघ की गतिविधियों की अध्यक्षता करता है और आंतरिक समितियों से जुड़े काम देखता है।
सचिव संघ का प्रमुख प्रशासनिक पदाधिकारी होता है। वह आधिकारिक पत्राचार और रिकॉर्ड संभालने के साथ बैठकों और संघ की गतिविधियों के आयोजन में भूमिका निभाता है।
संयुक्त सचिव वित्तीय रिकॉर्ड, कार्यक्रमों के आयोजन, कैंपस संचार और छात्रों की शिकायतों से जुड़े दस्तावेजी काम में भूमिका निभाता है।
उम्मीदवार बनने की क्या शर्तें हैं?
डूसू चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए उम्र, पढ़ाई और उपस्थिति से जुड़ी शर्तें निर्धारित हैं।
स्नातक छात्र: 17 से 22 वर्ष
स्नातकोत्तर छात्र: 24 से 25 वर्ष तक
शोधार्थी: अधिकतम 28 वर्ष
इसके अलावा उम्मीदवार नियमित छात्र होना चाहिए। उसके खिलाफ शैक्षणिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। कोई बैकलॉग, कंपार्टमेंट या फेल विषय नहीं होना चाहिए।उम्मीदवार के लिए निर्धारित अवधि में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति भी जरूरी है। केंद्रीय पद के लिए उम्मीदवार एक से अधिक बार चुनाव नहीं लड़ सकता।
चुनाव प्रचार में कितना खर्च कर सकते हैं?
एक उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार खर्च की अधिकतम सीमा 5,000 रुपये है। चुनाव के बाद उम्मीदवार को अपने खर्च का आॅडिटेड हिसाब जमा करना होता है।
2026 में कौन-कौन उम्मीदवार मैदान में?
2026 के डूसू चुनाव में चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं
अध्यक्ष: सात
उपाध्यक्ष: पांच
सचिव: चार
संयुक्त सचिव: चार
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं: अनन्या रतूड़ी, अश्मित कुमार, एजाज मंसूरी, समर्थ बेनीवाल, समीर कुमार, विजय शंकर मीणा और यश डबास।
उपाध्यक्ष पद पर अरण्या सिंह राठौर, दीपांशु शौकीन, इशु मौर्य, वीर छत्रथ और अक्षत शिखर उम्मीदवार हैं।
सचिव पद के लिए नम्रता चौधरी, पंकज कुमार, रिया छावड़ी और स्टैंजिन डेसक्योंग मैदान में हैं।
संयुक्त सचिव पद पर बी. पारिजात, गोपाल चौधरी, लक्ष्य राज सिंह और विशेष यादव चुनाव लड़ रहे हैं।
उम्मीदवारों की क्या है खासियत?
इस बार के उम्मीदवारों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी, एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैंडबॉल खिलाड़ी, दृष्टिबाधित छात्र और पहली बार लद्दाख से कोई छात्र भी शामिल है।
एबीवीपी का पैनल
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास कंझावला, दिल्ली के रहने वाले हैं। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी हैं और स्पेन, आॅस्ट्रेलिया व सर्बिया में आईटीएफ प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय का विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व किया है और खेलो इंडिया व अखिल भारतीय विश्वविद्यालय खेलों में भी हिस्सा लिया है।
संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार लक्ष्य राज सिंह एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार इशु मौर्य कैंपस लॉ सेंटर में पढ़ते हैं और 2021 से एबीवीपी से जुड़े हैं। वे सत्यवती कॉलेज मॉर्निंग इकाई के अध्यक्ष और स्टूडेंट्स फॉर सेवा के सह-संयोजक रह चुके हैं।
सचिव पद की उम्मीदवार रिया छावड़ी श्री अरविंदो कॉलेज की चौथे वर्ष की बीए कार्यक्रम की छात्रा हैं। वे बादरपुर के किसान परिवार से आती हैं और अंतर-महाविद्यालय स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुकी हैं।
एनएसयूआई का पैनल
एनएसयूआई के चारों उम्मीदवार बौद्ध अध्ययन में एमए कर रहे हैं। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा और संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार गोपाल चौधरी राजस्थान से हैं और दोनों प्रथम वर्ष के छात्र हैं। उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार वीर छत्रथ दिल्ली से हैं और प्रथम वर्ष में हैं। सचिव पद की उम्मीदवार नम्रता चौधरी दूसरे वर्ष की छात्रा हैं। एनएसयूआई ने किफायती आवास, बेहतर बुनियादी ढांचे और छात्र सुरक्षा को अपने प्रमुख मुद्दों में रखा है। एनएसयूआई, कांग्रेस का छात्र संगठन है और इसकी स्थापना 1971 में हुई थी।
आइसा-एसएफआई गठबंधन
आइसा-एसएफआई गठबंधन ‘नया, छात्र-नेतृत्व वाला डूसू’ बनाने की बात कह रहा है। गठबंधन ने पैसे और बाहुबल की राजनीति के खिलाफ तथा सुलभ और किफायती दिल्ली विश्वविद्यालय के मुद्दे को उठाया है।
अध्यक्ष पद की उम्मीदवार अनन्या रतूड़ी यौन उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव से जुड़े अभियानों में शामिल रही हैं। उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार अक्षत शिखर ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। बाद में वे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आइसा के 23 दिन के अनशन में भी शामिल हुए।
सचिव पद की उम्मीदवार स्टैंजिन डेसक्योंग हिंदू कॉलेज में एमएससी गणित की प्रथम वर्ष की छात्रा हैं और लेह से हैं। गठबंधन के अनुसार वह डूसू चुनाव लड़ने वाली पहली लद्दाखी छात्रा हैं। स्नातक की पढ़ाई के दौरान वे रामजस कॉलेज छात्र संघ की उपाध्यक्ष रही थीं।
संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार बी. पारिजात हंसराज कॉलेज में एमए अंग्रेजी की पढ़ाई कर रहे हैं और पीजीडीएवी कॉलेज की साहित्यिक सोसायटी के अध्यक्ष रह चुके हैं।
वहीं आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन एएसएपी अध्यक्ष पद के लिए अश्मित कुमार पवार और सचिव पद के लिए पंकज कुमार को उतारा है। इस पैनल से उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद के लिए कोई उम्मीदवार नहीं है।



