रांची

केंद्र के समक्ष झारखंड की तीन प्रमुख मांगें—खनन पर सेस लगाने का अधिकार, जीएसटी क्षति की भरपाई और जी-राम-जी में 90:10 फंडिंग अनुपात

Jharkhand's three key demands before the Centre—the right to levy a cess on mining, compensation for GST revenue loss, and a 90:10 funding ratio for the 'G-Ram-Ji' scheme.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची/ नई दिल्ली। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन ‘विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण’ में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के वित्तीय हितों और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। 18 और 19 सितंबर को आयोजित सम्मेलन में केंद्र और विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन में विकसित भारत के लक्ष्य के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय एवं नीतिगत समन्वय पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सिंचाई, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में वित्तपोषण बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास के वास्तविक आकलन के लिए केवल प्रति व्यक्ति आय, जीडीपी, विनिर्माण उत्पादन और अन्य वित्तीय आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज की वास्तविक आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में दावा किया कि केंद्र की नीतियों और खनिज क्षेत्र से जुड़े बदलावों के कारण झारखंड को 20 हजार से 22 हजार करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से मिलने वाला राजस्व झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्य के विकास और जनकल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल है तथा राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत है। उन्होंने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने और पूंजीगत व्यय को उच्च स्तर पर बनाए रखने की भी बात कही।
केंद्र के समक्ष रखीं तीन प्रमुख मांगें
वित्त मंत्री ने सम्मेलन में केंद्र सरकार के समक्ष झारखंड से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें रखीं—
खनन पर सेस लगाने का राज्य का अधिकार पुनर्बहाल किया जाए।
जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई की जाए।
जी-राम-जी योजना में केंद्र और राज्य के बीच 90:10 का फंडिंग अनुपात बहाल किया जाए।
झारखंड के वित्त मंत्री द्वारा इन तीन मांगों को केंद्र के समक्ष रखे जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
उन्होंने कहा कि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और अधिकार मिलने से ही देश के समग्र विकास को गति दी जा सकती है। सम्मेलन में वित्त मंत्रालय ने राज्यों के साथ मैक्रोइकोनॉमिक विकास, कृषि परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण के वित्तपोषण सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की। सम्मेलन में झारखंड के वित्त मंत्री के साथ वित्त सचिव प्रशांत कुमार, अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी, चंद्रभूषण प्रसाद, संयुक्त सचिव अनिरबान आईच तथा मंत्री के आप्त सचिव नरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button