झामुमो का धरना-प्रदर्शन में ‘हमारा खनिज, हमारा अधिकार’ के नारों से गूंजा प्रखंड कार्यालय परिसर; राष्ट्रपति के नाम बीडीओ को सौंपा ज्ञापन
JMM protest: Block office premises echoed with slogans of "Our minerals, our rights"; memorandum addressed to the President submitted to the BDO.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की पाकुड़ प्रखंड समिति की ओर से प्रखंड कार्यालय परिसर में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रखंड अध्यक्ष मुस्लेउद्दीन शेख ने किया। धरना में झामुमो जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम और सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता एवं समर्थक शामिल हुए। धरना-प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की खनिज नीति के विरोध में नारेबाजी की। पार्टी नेताओं ने कहा कि झारखंड जैसे खनिज उत्पादक राज्यों के अधिकारों और वित्तीय हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर झामुमो लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। धरना को संबोधित करते हुए झामुमो जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम ने कहा कि MMDR संशोधन अधिनियम, 2026 राज्यों के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधन के जरिए खनिज अधिकारों एवं खनिज-युक्त भूमि पर राज्यों की कर लगाने की शक्ति सीमित की गई है।
उन्होंने वर्ष 2024 के सुप्रीम कोर्ट के नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने राज्यों की खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति को मान्यता दी थी। उनका आरोप था कि नए कानून से उस अधिकार पर अंकुश लगाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2024 में Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Limited मामले में राज्यों की खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया था। इसके बाद MMDR संशोधन अधिनियम, 2026 में नई धारा 9D के तहत राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर नए कर, सेस या अन्य लेवी लगाने को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन किया गया है। सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव ने केंद्र सरकार पर खनिज संपदा से जुड़े मामलों में कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा राज्य की अर्थव्यवस्था और यहां के लोगों के विकास से सीधे जुड़ी है। उन्होंने झारखंड के लंबित खनन बकाये का मुद्दा उठाते हुए 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया और केंद्र सरकार से इसके भुगतान की मांग की। यह आंकड़ा पार्टी नेताओं द्वारा किया गया दावा है; धरना के दौरान इसकी स्वतंत्र पुष्टि का कोई दस्तावेज सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया। धरना-प्रदर्शन के बाद जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम, सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव, प्रखंड अध्यक्ष मुस्लेउद्दीन शेख और नगर अध्यक्ष मुकेश सिंह के नेतृत्व में झामुमो प्रतिनिधिमंडल ने पाकुड़ के बीडीओ से मुलाकात की और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में झामुमो की ओर से प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी गईं—
MMDR संशोधन अधिनियम की धारा 9D में किए गए प्रावधान पर पुनर्विचार किया जाए।
खनिज उत्पादक राज्यों के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
झारखंड के कथित लंबित खनन बकाये का भुगतान कराया जाए।
खनिज नीति और विकास प्रक्रिया में आदिवासी-मूलवासी समाज के हितों एवं अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए।
केंद्र सरकार का पक्ष इससे अलग है। खान मंत्रालय के अनुसार MMDR संशोधन अधिनियम, 2026 से राज्यों को मिलने वाला खनन राजस्व समाप्त नहीं होगा। सरकार का कहना है कि रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF और जीएसटी में राज्यों की हिस्सेदारी जारी रहेगी तथा खनन क्षेत्र से होने वाले कुल कर एवं वैधानिक भुगतानों का लगभग 90 प्रतिशत राज्यों को मिलता रहेगा। धरना-प्रदर्शन में अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष कदम रसूल, जिला संयुक्त सचिव जहूर आलम, केंद्रीय समिति सदस्य उमर फारूक, बुद्धिजीवी जिला उपाध्यक्ष प्रकाश सिंह, जिला युवा उपाध्यक्ष रेजाउल हक, नगर अध्यक्ष मुकेश सिंह, प्रखंड सचिव राजेश सरकार, उपाध्यक्ष अजफरुल शेख, रामसिंह टुडू, इस्माइल रहमान, सत्तार शेख, प्रकाश हांसदा, अल्पसंख्यक प्रखंड अध्यक्ष मुसर्रफ हुसैन, महिला प्रखंड अध्यक्ष मीना मुर्मू सहित झामुमो के विभिन्न पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सैकड़ों समर्थक मौजूद रहे।



