रावण को श्राप देकर सती हुई वेदवती

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। नगर के गौशाला भवन में श्रीरामलीला महोत्सव के दूसरे दिन रावण-वेदवती संवाद समेत कई प्रसंगों का मंचन किया गया।
रविवार रात मंचन में दिखाया गया कि जंगल में विचरण करते हुए रावण की नजर विष्णु भगवान की परम भक्त कुशध्वज ऋषि की पुत्री वेदवती पर पड़ती है। रावण उन्हें मोहित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन वेदवती उसके प्रस्ताव को ठुकरा देती हैं। रावण द्वारा स्पर्श किए जाने पर वेदवती उन्हें श्राप देती है कि वह सती होकर पुनर्जन्म लेगी और उनके विनाश का कारण बनेगी। इसके बाद वेदवती सती हो जाती है और आगे चलकर सीता के रूप में जन्म लेती है। दूसरे दृश्य में रावण पुष्पक विमान से मारीच के साथ कैलाश पर्वत पार करने का प्रयास करते हैं, लेकिन विमान रुक जाता है। नंदीगण के समझाने के बावजूद रावण कैलाश को उठाने का प्रयास करते हैं। बाद में भगवान शिव से क्षमा मांगने पर वह प्रसन्न होते हैं और रावण को चंद्रहास तलवार प्रदान करते हैं। तीसरे दृश्य में मेघनाथ द्वारा देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों को बंदी बनाने का प्रसंग दिखाया गया। ऋषियों के श्राप के बाद उनके रक्त से भरा घड़ा रावण मिथिलापुरी में दबवा देते हैं। अकाल के दौरान राजा जनक खेत जोतते हैं और उसी घड़े से सीता की उत्पत्ति होती है। रावण की भूमिका सभासद शगुन मित्तल एडवोकेट, वेदवती की शिवम गोयल, शंकर भगवान की मनोज मित्तल सोनू, नंदीगण की सहर्ष सिंघल, मेघनाथ की अभिषेक भारद्वाज, मारीच की अनमोल शर्मा और सीता की राधा गोयल ने निभाई। रावण दरबार और कैलाश पर्वत की सिनरी सुनील टिल्लू व अभिषेक गोयल ने तैयार की।


