असम

नवलेखक शिविर से उत्कृष्ट नवलेखक के निर्माण में सहायक – डॉ.भारत भूषण शर्मा

समापन समारोह में असम के शिक्षक व शिविरार्थी को विशेष पुरस्कार प्रदान

अहिल्यानगर (महाराष्ट्र)में केंद्रीय हिंदी निदेशालय , शिक्षा मंत्रालय तथा नया कला, वाणिज्य और वाणिज्य महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदीतर भाषी नवलेखक शिविर का भव्य समारोह

विश्वनाथ,29 जुलाई: जम्मू-कश्मीर के जाने-माने हिंदी लेखक भारत भूषण शर्मा ने कहा कि गैर-हिंदी भाषी हिंदी लेखकों के लिए शिविर विभिन्न साहित्यिक विधाओं में लिखने वाले नए लेखकों को एक दिशा प्रदान करता है। वह शिविर के समापन समारोह में बोल रहे थे।हिंदीतरभाषी हिंदी नवलेखकों के लिए हिंदीतरभाषी नवलेखक शिविर का आयोजन न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज, पारनेर और केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में 21 जुलाई, 2025 से 28 जुलाई, 2025 तक किया गया था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रंगनाथ अहेर ने की। जाने-माने लेखक भारत भूषण शर्मा ने आगे कहा कि लेखकों का निर्माण सामाजिक रीति-रिवाजों और साहित्यिक लेखन प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से होता है। भाषा संस्कृति की वाहक होती है। इसलिए संस्कृति हमें एक-दूसरे से जोड़ती है। मेरा निर्माण भी ऐसे शिविरों के माध्यम से हुआ है।

इस अवसर पर पुणे आकाशवाणी के पूर्व सहायक निदेशक एवं प्रसिद्ध प्रस्तोता एवं लेखक डॉ. सुनील देवधर ने कहा, “देश की सभी भाषाएँ ज्ञान और संस्कृति के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। हमारे देश में भाषा पर अधिकार करना, कुशल, प्रखर और योग्य लेखकों का निर्माण करना और आने वाली पीढ़ी के लिए उपयुक्त लेखन करना अत्यंत आवश्यक है। शब्दों में बहुत शक्ति होती है, हमें साहित्य का उपयोग संस्कृति के विकास के लिए करना चाहिए।”

अहमदनगर जिला मराठा विद्या प्रसारक समाज संस्था के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. भाऊसाहेब खिलाड़ी ने कहा, “अपनी भाषा के माध्यम से संस्कृति शीघ्र समझ में आती है। अपनी भाषा के माध्यम से ही उसे प्रमुखता से व्यक्त भी किया जा सकता है। हमारा भारत एक ऐसा देश, प्रांत, भाषा और संस्कृति है जो एकता में बंधे हैं। हमारा देश भाषा की दृष्टि से संरचित है। अलग-अलग क्षेत्रों की अलग-अलग भाषाएँ हैं, लेकिन चूँकि देश के अधिकांश क्षेत्रों में हिंदी बोली जाती है, इसलिए यह पूरे देश को जोड़ने का काम करती है।”

समापन समारोह के अध्यक्ष महाविद्यालय प्राचार्य डॉ.रंगनाथ आहेर ने कहा, “ये शिविर नए लेखकों को लेखन में दिशा प्रदान करता हैं। साहित्य लेखन के लिए नए विचार महत्वपूर्ण हैं। ऐसे नए विचारों को हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाना चाहिए। अगर हमें अपने जीवन को और अधिक प्रभावी और गहन बनाना है, तो आने वाले समय में ऐसे शिविरों के आयोजन की आवश्यकता है। मुझे आशा है कि भविष्य में नए लेखक शिविरों से नए लेखकों की एक पीढ़ी अवश्य उभरेगी।” ऐसा विश्वास व्यक्त किया।इस अवसर पर हिंदी सेवी सैय्यदा अनुवारा खातून (असम), संतोष कुमार महतो (असम), विमल कुमार चौधरी (गुजरात) रविन्द्र उगले और सुजीत कुमार शर्मा (असम,) सहित प्रतिभागी शिविरार्थियों ने अपने विचार व्यक्त किए और अनूप शर्मा (असम) ने आठ दिवसीय शिविर के अनुभव पर स्वरचित उत्कृष्ट कविता प्रस्तुति की , जिससे सभा में तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। मुख्य अतिथि द्वारा प्रतिभागी नवलेखक शिविरार्थियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन प्रो. शुभदा अराडे और प्रो. प्रतीक्षा तनपुरे ने किया। प्रास्ताविक डॉ. हनुमंत गायकवाड़ ने किया, धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. विजयकुमार राउत ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्रोफेसर, प्रशासनिक कर्मचारी उपस्थित थे।

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