गौरव को मिली राहत: तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप गलत साबित
तहसीलदार न्यायालय ने एकपक्षीय आदेश किया निरस्त, लेखपाल से मांगा स्पष्टीकरण
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। ग्राम गोठरा निवासी गौरव पुत्र संतराम को तहसीलदार न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। ग्राम सभा की तालाब भूमि पर अवैध कब्जे के लगाए गए आरोपों को न्यायालय ने निराधार मानते हुए, दिनांक 07 अप्रैल 2025 को पारित एकपक्षीय आदेश को निरस्त कर दिया है।
साथ ही न्यायालय ने इस मामले में लेखपाल की प्रारंभिक रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए उससे स्पष्टीकरण तलब किया है। न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि लेखपाल द्वारा मानक प्रक्रिया का पालन न करने और न्यायालय का समय व्यर्थ करने के कारण, उत्तर प्राप्त होने के पश्चात नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गौरव पुत्र संतराम पर ग्राम गोठरा की खसरा संख्या 292, रकबा 0.5500 हेक्टेयर, जिसमें तालाब दर्ज है, के लगभग 112 वर्ग मीटर हिस्से पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया था। इसी आधार पर तहसीलदार न्यायालय ने पूर्व में गौरव के विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया था।
गौरव ने न्यायालय में दाखिल की आपत्ति
गौरव ने दिनांक 28 अगस्त 2025 को तहसीलदार न्यायालय में आपत्ति पत्र दाखिल कर बताया कि उक्त आदेश बिना किसी पूर्व सूचना के, एकतरफा रूप से पारित किया गया, जिसकी उसे कोई जानकारी नहीं थी।
गौरव ने दावा किया कि वह तालाब की भूमि पर कभी काबिज नहीं रहा और यह शिकायत झूठी, भ्रामक एवं दुर्भावनापूर्ण है। अतः न्यायालय से पुनः सुनवाई की मांग की।
राजस्व निरीक्षक की जांच में आरोप झूठे साबित
तहसीलदार न्यायालय ने गौरव की आपत्ति पर संज्ञान लेते हुए राजस्व निरीक्षक से भौतिक सत्यापन कराया।
दिनांक 21 जुलाई 2025 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि गौरव का मकान तालाब से लगभग 600 मीटर की दूरी पर स्थित है और उसका खसरा संख्या 292 की भूमि पर कोई भी कब्जा नहीं पाया गया।
लेखपाल की भूमिका संदिग्ध, स्पष्टीकरण तलब
न्यायालय ने यह भी पाया कि क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक रिपोर्ट में अवैध कब्जे की पुष्टि की गई थी, जबकि जांच में वह पूरी तरह असत्य साबित हुई।
इस गंभीर लापरवाही पर लेखपाल से स्पष्टीकरण तलब किया गया है कि क्यों मानक आख्या प्रस्तुत नहीं की गई और झूठे तथ्य न्यायालय के समक्ष रखे गए।
तहसीलदार न्यायालय ने अपने नवीन आदेश में स्पष्ट किया:
“चूंकि गौरव पुत्र संतराम का तालाब की भूमि (खसरा संख्या 292) पर कोई भी कब्जा नहीं पाया गया है, अतः पूर्व में पारित आदेश दिनांक 07/04/2025 को निरस्त किया जाता है।”
साथ ही न्यायालय ने संबंधित अप्र-19 दिनांक 03/08/2024 को भी वापस लेने के निर्देश दिए हैं।
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