बालाघाट

सहकारी कर्मचारियों की हड़ताल का 14 वा दिन

26 सितम्बर को मुख्यमंत्री आवास घेर इस्तीफा सौपने की तैयारी मे सहकारिता कर्मचारी

कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे व विवेक पटेल ने सहकारिता कर्मचारियों के साथ मंच किया साझा
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) :  बालाघाट सहित प्रदेश के 55 जिलों के सहकारीता कर्मचारियों की हड़ताल से आम जनता परेशान है। पिछले 14 दिनों से जिले की 126 सहकारी समितियों में ताला लगा हुआ है। इससे किसानों को खाद और ऋण नहीं मिल पा रहा है। साथ ही गरीबों को पीडीएस के तहत राशन का वितरण भी रुका हुआ है।
             आज़ कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे और विवेक पटेल ने आंदोलनकारी सहकारिता कर्मचारियों से मुलाकात कीऔर मंच साझा किया । विधायक श्रीमती अनुभा मुंजारे ने कहा कि कांग्रेस सहकारी कर्मचारियों के आंदोलन को पूरा समर्थन देगी । उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों का शोषण बंद कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना चाहिए।
               मध्यप्रदेश सहकारी कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय प्रतिनिधि दिनेश परिहार ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मांगें नहीं मानती है तो 24 सितंबर तक जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन होगा। इसके बाद 26 सितंबर को सभी 55 जिलों के सहकारी कर्मचारी भोपाल में मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे। वे अपना इस्तीफा भी मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।
           यह आंदोलन 8 सितंबर से चल रहा है। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर धरने पर बैठे हैं। विधायक विवेक पटेल ने सरकार से आग्रह किया है कि वह कर्मचारियों की मांगें मानकर उन्हें काम पर वापस बुलाए।
 यह है सोसाइटी कर्मचारियों की मांगे
          सोसाइटी कर्मचारी 60 प्रतिशत संस्था कर्मचारियों को प्रबंधक के पद पर प्रमोट करने के आदेश के बाद चयन प्रक्रिया का पालन नहीं होने, विक्रेताओं को तीन हजार रूपए मानदेय और प्रतिवर्ष सोसायटियो को मिलने वाली प्रबंधकीय अनुदान 3 लाख रूपए की डिमांड कर रहे है।
               इन प्रांतीय डिमांड के अलावा जिले में बीते वर्ष समर्थन मूल्य में किसानों से खरीदी गई धान में 16 सौ से ज्यादा किसानों को भुगतान नहीं कर पाने से किसानों की ओर से की गई शिकायत के बाद, सोसायटियों के अनुदान से 6 करोड़ से ज्यादा की राशि जमा कराई गई, लेकिन उसे अब तक नहीं लौटाया गया है।
           जिससे समितियों की बचत खाली हो गई हैं। इसके अलावा समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान में प्रासंगिक व्यय, कमीशन और कम्प्युर ऑपरेटर की राशि भी अब तक नहीं दी गई है। जिसके निराकरण की मांग कर्मचारी कर रहे है।
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