क्षतिपूर्ती का भुगतान नहीं करने पर उच्च न्यायालय में करेंगे मुकदमा – विजय शंकर नायक
If compensation is not paid, we will file a case in the High Court - Vijay Shankar Nayak

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची । आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने आश्रायनी के प्रभावित विस्थापितों के हितार्थ कहा कि सारंडा मे अश्रायनी बनाने के पहले झारखण्ड में बने पूर्व के 9 आश्रायनी के प्रभावित विस्थापितों को राज्य की हेमन्त सरकार 6,000 करोड़ राशी क्षतिपूर्ती का भुगतान करे अन्यथा वन्य जीव (सरंक्षण) अधिनियम,1972 के धारा 18A(1)के अब तक उलंघन होने पर उच्च न्यायालय पर केस किया जायेगा। नई सेंचुरी सारंडा बनाने से पहले ही पूर्व प्रभावित विस्थापित परिवारों को 6,000 करोड़ राशी क्षतिपूर्ती का भुगतान देना अनिवार्य होगा तब ही सेंचुरी सारंडा बनाने की दिशा में कारवाई करनी होगी नही तो सरकार की फजीहत झारखण्ड उच्च न्यायालय में होना तय है | नायक ने आगे कहा कि इन सभी झारखण्ड में बने पूर्व के 9 आश्रायनी में वन्य जीव (सरंक्षण) अधिनियम ,1972 के धारा 19 से 25 तक कोई कारवाई नही कभी की गई और न ही कभी धारा 26 के अधीन अंतिम रूप से किसी आश्रायनी अधिसूचना निर्गत ही की गई है और न ही 18A(1) के अंतर्गत विस्थापितों के प्रभावित परिवार लोगो को आवश्यकताओ की ही पूर्ति की गयी है | इन्होने यह भी कहा की धारा 19 से 25 के अंतर्गत कोई कारवाई नही किये जाने एवं 9 आश्रायनी के विस्थापितों के प्रभावित परिवार लोगो को उनके हक़ से वंचित किये जाने के कारण 2003 में श्री अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार द्वारा (wild life Protection) Act 1972 में संसोधन कर धारा 18 (2 ) जोड़ी गई , जिसमे अंतिम अधिसूचना धारा 26 के अन्तर्गत प्रकाशित होने तक उन विस्थापितों के प्रभावित परिवार लोगो के मवेशियों के लिए चारा ,उनको जलावन एवं अन्य वन आधारित उनके हको को सरकार के द्वारा मुफ्त मुहैया कराने की आदेश है मगर झारखण्ड सरकार या वन विभाग ने कभी भी इस पर ध्यान नही दिया और इस धारा 18 (2 ) का अनुपालन नही किया | नायक ने आगे कहा की मोटे तौर से लगभग आज 30 लाख लोग उन आश्रयानी वनों पर आश्रित है जो 6 लाख परिवार माने जा सकते है | पिछले 50 वर्षो में और प्रति परिवार 20,000 रुपया प्रतिवर्ष की आवश्यकता होने पर यह राशी 6,000 हजार करोड़ आती है जो विस्थापित प्रभावित ग्रामीणों का सरकार पर बकाया है | इस बिच भारत सरकार ने Eco-sensitiveZone की अधिसूचना उन सभी 9 आश्रयणीयों के लिए कर दी है | दलमा आश्रयणी के लिए यह S.O. 680(E) है दिनांक 2012 area: 522.98 है इससे और भी जयादा व्यक्ति ग्रामीणों के हक प्रभावित हो रहे है | इन्होने साफ शब्दों में कहा की अगर सरकार इन प्रभावित विस्थापितों के परिवारों को अगर क्षतिपूर्ती के रूप में 6,000 हजार करोड़ राशी का भुगतान नही किया जाता है तो केंद्र एवं राज्य सरकार को तथा वन विभाग को उच्च न्यायालय मे पार्टी बना कर केस किया जायेगा।



