बाराबंकी

अति कुपोषित 3 माह के कार्तिक को मिली नई जिंदगी एनआरसी वार्ड की इंचार्ज नर्स रचना तिवारी और डॉ. सिकंदर अली की टीम ने किया कमाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

बाराबंकी। जिला सरकारी अस्पताल के न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर (NRC) में भर्ती तीन माह के कार्तिक ने कुपोषण से जंग जीत ली है। टिकैतनगर से रेफर होकर आए इस शिशु की हालत भर्ती के वक्त बेहद गंभीर थी, लेकिन एनआरसी की इंचार्ज नर्स रचना तिवारी और चिकित्सक डॉ. सिकंदर अली की विशेषज्ञ देखभाल ने उसे नई जिंदगी दे दी।
गंभीर हालत में सीएचसी से रेफर
टिकैतनगर निवासी पूनम अपने बेटे कार्तिक को लेकर स्थानीय सीएचसी पहुँची थीं, जहां डॉक्टरों ने बच्चे की तेजी से गिरती सेहत और कमजोरी को देखते हुए तुरंत जिला अस्पताल के एनआरसी वार्ड में रेफर किया।
5 नवंबर को भर्ती कार्तिक को देखते ही चिकित्सा टीम अलर्ट मोड पर आ गई।
इंचार्ज नर्स रचना तिवारी ने संभाला मोर्चा
एनआरसी पहुंचते ही स्टाफ नर्स रचना तिवारी ने बच्चे का उपचार शुरू कराया।
डॉ. सिकंदर अली ने बच्चे की नाजुक स्थिति को देखते हुए विशेष निगरानी एवं पोषण संबंधी निर्देश दिए और मां को आश्वस्त किया कि कार्तिक को हर संभव सुविधा प्रदान की जाएगी।
14 दिनों में चमत्कारिक सुधार
एनआरसी प्रोटोकॉल के तहत—
हर दो घंटे पर फीड
उम्र के अनुसार दूध हलुआ, खिचड़ी और पौष्टिक भोजन
संक्रमण, डिहाइड्रेशन और हाइपोथर्मिया की निरंतर निगरानी
सभी दवाएं और जांचें नि:शुल्क
इस व्यवस्थित उपचार से कार्तिक का वजन 2.650 किग्रा से बढ़कर 3.800 किग्रा हो गया।
“मेरा बच्चा फिर मुस्कुराने लगा”—मां पूनम
बच्चे की मां पूनम ने कहा—
“जब मैं कार्तिक को लेकर आई थी, वह बहुत कमजोर था। डिस्चार्ज के समय उसका वजन लगभग डेढ़ किलो बढ़ गया। मेरे बच्चे की मुस्कान लौट आई है। मैं रचना मैडम, डॉक्टर साहब और पूरे स्टाफ की आभारी हूं।”
एनआरसी क्या करता है?
एनआरसी में 1 माह से 5 वर्ष तक के गंभीर कुपोषित बच्चों का मुफ्त इलाज होता है।
यहाँ—
14 दिन तक भर्ती सुविधा
दवा, जांच, भोजन पूरी तरह नि:शुल्क
डिस्चार्ज पर मां को 700 रुपये प्रोत्साहन राशि
पोषण पुनर्स्थापन एवं संक्रमण नियंत्रण की विशेषज्ञ देखभाल
डॉक्टरों ने की जागरूकता की अपील
डॉ. सिकंदर अली ने कहा—
“बच्चों का वजन घट रहा हो, दूध पीना कम करें या कमजोरी दिखे तो तुरंत एनआरसी लेकर आएं। यहां प्रशिक्षित टीम निरंतर देखभाल करती है।”
इंचार्ज नर्स रचना तिवारी ने कहा—
“समय पर इलाज मिलने से बच्चे जल्दी ठीक होते हैं। ऐसे सफल उदाहरण लोगों में जागरूकता बढ़ाते हैं।”
कार्तिक के स्वास्थ्य लाभ के बाद स्थानीय लोगों में जिला अस्पताल के एनआरसी वार्ड की कार्यशैली की व्यापक सराहना हो रही है।
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