पाकुड़

झारखण्ड गठन के वर्षों बाद भी मालपहाड़ी ओपी को नहीं मिला थाना का दर्जा, बढ़ती आबादी और सुरक्षा पर गंभीर सवाल

Even years after the formation of Jharkhand, Malpahari OP has not been granted police station status, raising serious questions about the growing population and security.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।

पाकुड़। वर्तमान में पाकुड़ जिले के अन्तर्गत आने वाला मालपहाड़ी ओपी क्षेत्र ऐतिहासिक, भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने के बावजूद अब तक पूर्ण थाना का दर्जा प्राप्त नहीं कर सका है। बताया जाता है कि मालपहाड़ी ओपी की स्थापना बिहार राज्य के समय तत्कालीन साहिबगंज जिले में आमजन की सुरक्षा, भौगोलिक परिस्थितियों तथा क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की गई थी। बिहार राज्य के साहेबगंज जिला का विभाजन के बाद जब पाकुड़ जिला अस्तित्व में आया, तब से इस क्षेत्र की आबादी में निरंतर और तेज़ी से वृद्धि हुई है। यदि वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाकुड़ प्रखंड की कुल आबादी लगभग 2,82,069 थी। वहीं वर्ष 2025 में यदि केवल मतदाताओं की संख्या पर ही दृष्टि डालें तो पाकुड़ प्रखंड में लगभग 2.52 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि मालपहाड़ी ओपी क्षेत्र सहित पूरे प्रखंड की वास्तविक जनसंख्या 2011 की तुलना में कई गुना बढ़ चुकी है। झारखंड राज्य के गठन के साथ-साथ बढ़ती आबादी, सुरक्षा की बढ़ती जरूरत और जटिल भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह अपेक्षा की जा रही थी कि लगभग 40 वर्ष पूर्व स्थापित मालपहाड़ी ओपी को अब तक थाना का दर्जा मिल जाना चाहिए था। किंतु हैरानी की बात यह है कि अब तक इस दिशा में न तो किसी जनप्रतिनिधि द्वारा ठोस पहल की गई और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई निर्णायक कदम उठाया गया। मालपहाड़ी ओपी क्षेत्र पत्थर उद्योग का प्रमुख केंद्र है और जिले का सर्वाधिक राजस्व देने वाला क्षेत्र माना जाता है। इसी क्षेत्र के काले पत्थर के कारण पाकुड़ को ‘काले पत्थरों की नगरी’ के रूप में पहचान मिली है, जो जिले की ऐतिहासिक और औद्योगिक विरासत को दर्शाता है। बावजूद इसके, क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था आज भी ओपी स्तर तक ही सीमित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए मालपहाड़ी ओपी को शीघ्र थाना का दर्जा दिया जाना आवश्यक है। इससे न केवल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी गति आयेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस लंबे समय से लंबित मांग पर कब तक संज्ञान लेते हैं। यदि सर्वेक्षण किया गया तो मालपहाड़ी ओपी एक थाना स्थापना की सभी अर्हताएं पूर्ण करता हुआ तस्वीरें साफ झलकता हुआ पेश – ए- नजर आयेंगी। वही पाकुड़ को संवारने की जद्दोजहद में लगे उपायुक्त मनीष कुमार के साथ – साथ एसपी निधि द्विवेदी पर भी उम्मीद जताई जा रही है कि मालपहाड़ी ओपी को पूर्ण रूप से थाना का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका अदा करते हुए क्षेत्र वासियों के चेहरे पर मुस्कान की पेशकश करने में आवश्यक कदम उठायेंगे।

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