
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस सिरप के सेवन से बच्चों की मौतों की घटनाओं के बाद लिया गया, जहां सिरप में जहरीला रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) पाया गया। सहायक आयुक्त औषधि दिनेश कुमार तिवारी ने आदेश जारी करते हुए सभी सरकारी और निजी दवा दुकानों, अस्पतालों और फार्मेसियों में इस सिरप की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है।
प्रतिबंध का कारण
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सितंबर 2025 से अब तक 11 से अधिक बच्चों की मौत संदिग्ध किडनी फेलियर से हुई, जिसका संबंध कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) से बताया जा रहा है। लैब जांच में इस बैच में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (48.6% w/v) की मौजूदगी पाई गई, जो एक विषैला रसायन है और किडनी, लीवर और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इसे गंभीरता से लेते हुए तमिलनाडु की निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स के खिलाफ जांच शुरू की है।
आधिकारिक आदेश
सहायक आयुक्त औषधि के आदेश में निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:बिक्री और वितरण पर रोक: किसी भी मेडिकल स्टोर, अस्पताल या फार्मेसी में कोल्ड्रिफ सिरप का स्टॉक, बिक्री या उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित।जब्ती और सैंपलिंग: सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी यह सिरप मिले, उसे तुरंत जब्त कर लैब में जांच के लिए भेजा जाए निरीक्षण अभियान: खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने संयुक्त निरीक्षण दलों को फार्मा कंपनियों, दवा दुकानों और अस्पतालों में छापेमारी के लिए सक्रिय किया है।निर्माता पर कार्रवाई: CDSCO ने तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल और अन्य राज्यों में श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स की फैक्ट्रियों पर जांच शुरू की है।
जनता के लिए सलाह सरकार का रुख
उत्तर प्रदेश सरकार ने जनता से अपील की है कि कोल्ड्रिफ सिरप का उपयोग तुरंत बंद करें। यदि आपके पास यह सिरप है, तो इसे नजदीकी औषधि निरीक्षक या FSDA कार्यालय में जमा करें। बच्चों को कोई भी कफ सिरप देने से पहले डॉक्टर से परामर्श और बैच नंबर की जांच करें। शिकायत के लिए FSDA हेल्पलाइन या स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर से संपर्क करें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। FSDA और CDSCO मिलकर दवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जांच अभियान चला रहे हैं। यह कदम उत्तर प्रदेश में ऐसी घटनाओं को रोकने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उठाया गया है।




