गोड्डा

हूल दिवस पर झामुमो द्वारा सुंदर डैम परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित

- कार्यकर्ताओं ने वीर शहीद सिद्धू-कान्हू, चाँद-भैरव को किया नमन।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
  – पारंपरिक फुटबॉल प्रतियोगिता का भी हुआ शुभारंभ
गोड्डा/बोआरीजोर : संथाल समाज के इतिहास में गौरव का प्रतीक हूल दिवस पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से सुंदर डैम परिसर में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वीर शहीद सिद्धू-कान्हू, चाँद-भैरव की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम की शुरुआत संथाली रीति-रिवाजों के अनुसार पारंपरिक मंत्रोच्चारण व ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच हुई।
कार्यकर्ताओं ने वीर सपूतों को नमन करते हुए उनके बलिदान और संघर्ष को याद किया। वक्ताओं ने बताया कि 30 जून 1855 को सिद्धू और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में हजारों संथालों ने अंग्रेजी हुकूमत और महाजनी शोषण के खिलाफ बिगुल फूंका था। यह क्रांति केवल स्वतंत्रता संग्राम का अध्याय नहीं, बल्कि आदिवासी आत्मसम्मान और पहचान की लड़ाई थी हूल दिवस समारोह के अंतर्गत हर वर्ष की भांति इस बार भी पारंपरिक फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जो स्थानीय युवाओं में काफी लोकप्रिय है। प्रतियोगिता का शुभारंभ झामुमो के वरिष्ठ नेता ताला बाबु हांसदा, जर्मन बास्की और इंद्रजीत पंडित ने फीता काटकर व प्रतीकात्मक किक मारकर किया।
इस मौके पर सुंदर डैम परिसर जनसैलाब में तब्दील हो गया। दूर-दराज से आए ग्रामीण, महिलाएं, युवा, छात्र एवं बुजुर्ग भारी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य और संथाली गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को भावपूर्ण बना दिया। इस दौरान मुख्य अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन हमें हमारी जड़ों की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि शहीदों की कुर्बानियों को केवल याद करना ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करना भी हमारी जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। स्थानीय प्रशासन और आयोजकों द्वारा पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था सहित हर पहलू का ध्यान रखा गया।
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