मथुरा

जीआई टैग से जरी पोशाक की विशिष्टता को मिली कानूनी सुरक्षा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
मथुरा। ब्रज क्षेत्र की विश्व प्रसिद्ध ठाकुरजी की जरी पोशाक को भौगोलिक सूचकांक (जीआई टैग) मिलने से मथुरा-वृंदावन के हजारों कारीगरों के हस्तशिल्प की पहचान को नई ताकत मिलेगी। जीआई टैग मिलने से अब पोशाक की शुद्धता और विशिष्टता को कानूनी सुरक्षा मिल गई है। इससे बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों में भारी वृद्धि की उम्मीद है, साथ ही नकल पर भी रोक लगेगी। पोशाक निर्माण का यह कार्य मथुरा की हजारों महिला कारीगरों के लिए सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। प्रदेश सरकार की प्रोत्साहन नीतियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से इन महिलाओं के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है, जिसकी मिसाल मथुरा की प्रियंका और प्रेक्षा जैसी महिलाएं हैं। रोजगार दीदी के नाम से मशहूर और खजानी वेलफेयर सोसाइटी की निदेशक शिप्रा राठी ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि योगी सरकार का यह कदम अत्यंत दूरदर्शी है। जीआई टैग इन कारीगरों को एक नई पहचान देगा और उनके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत विश्वसनीयता प्रदान करेगा। यह पहल सांस्कृतिक धरोहर और अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि स्थानीय उत्पादों को सही सरकारी समर्थन मिलने पर वे वैश्विक पटल पर भी अपनी छाप छोड़ सकते हैं और लाखों लोगों के लिए आय और आत्मनिर्भरता का स्थायी स्रोत बन सकते हैं।
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