नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अलवर : नगर विकास न्यास (UIT) की लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल आखिरकार एक ही बारिश ने खोल दी। काली मोरी फाटक के नीचे बने पार्क की मजबूत बताई जा रही दीवार मानसून की पहली ही फुहार में ध्वस्त हो गई। यह घटना न सिर्फ घटिया निर्माण कार्य की पुष्टि करती है, बल्कि UIT के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, लापरवाही और जिम्मेदारों की मिलीभगत को भी उजागर करती है।
जिस निर्माण की गारंटी तीन साल बताई गई थी, वह एक साल भी नहीं टिक सका। यह साफ दर्शाता है कि निर्माण कार्य में कितनी बेशर्मी से घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। जनता के टैक्स के पैसे से बना यह पार्क, अब नगर विकास न्यास के भ्रष्ट तंत्र की नजीर बन चुका है।
यह कोई पहली घटना नहीं है। विज्ञान नगर, शालीमार नगर की सड़कों और ट्रांसपोर्ट नगर के डिवाइडर में पहले ही करोड़ों रुपये के घोटाले की फाइलें खुल चुकी हैं। लेकिन शर्मनाक यह है कि बार-बार ऐसे मामले सामने आने के बावजूद ना तो किसी अधिकारी पर कार्रवाई होती है, ना ही किसी ठेकेदार पर कोई सख्ती दिखाई जाती है। उल्टा भ्रष्टाचार को और खुली छूट मिलती जा रही है।
ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या नगर विकास न्यास अब भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है? क्या जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे शब्द UIT की शब्दावली से गायब हो चुके हैं?
इस दीवार का गिरना महज एक निर्माण कार्य की विफलता नहीं, बल्कि एक सड़ चुके प्रशासनिक तंत्र का जीता-जागता प्रमाण है, जो जनता की जेब काटकर अपने जेबें भरने में जुटा है।



