
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर टेरिटोरियल आर्मी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में गोमती नदी की स्वच्छता और पुनर्जनन के लिए ‘गोमती नदी पुनर्जीवन मिशन’ की घोषणा की। इस मिशन को ‘स्वच्छ, अविरल और निर्मल गोमती’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और जीवनधारा की प्रतीक है। इस मिशन के माध्यम से हम न केवल जल शुद्धिकरण, बल्कि पर्यावरण और संस्कृति के पुनर्संवर्धन का एक व्यापक अभियान शुरू कर रहे हैं।”
मिशन के प्रमुख उद्देश्य
‘गोमती नदी पुनर्जीवन मिशन’ का दायरा पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती के सम्पूर्ण प्रवाह क्षेत्र को कवर करेगा। मिशन के तहत निम्नलिखित रणनीतियों पर विशेष जोर दिया गया है:
.सीवरेज नियंत्रण: गोमती में एक बूंद सीवरेज न गिरे, इसके लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय लागू किए जाएंगे।
.अवैध बस्तियों पर कार्रवाई: नदी किनारे बसी अवैध बस्तियों में घुसपैठियों की पहचान कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी, ताकि तटों की स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित हो।
.संसाधन उपलब्धता: ट्रैक बोट, फ्लोटिंग बैरियर, एक्सकेवेटर जैसे आधुनिक उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।
.जन-आंदोलन: यह मिशन केवल सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी से एक जन-आंदोलन का रूप लेगा।
गोमती टास्क फोर्स: शासन और समाज का सेतु
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत जनवरी 2025 में गठित गोमती टास्क फोर्स इस मिशन की रीढ़ होगी। इसमें राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम, लखनऊ नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विशेषज्ञ शामिल हैं। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के प्रो. (डॉ.) वेंकटेश दत्ता और अतुल्य गंगा ट्रस्ट के सह-संस्थापक ले. कर्नल देवेंद्र चौधरी (सेवानिवृत्त) इस टास्क फोर्स के प्रमुख सदस्य हैं। यह टास्क फोर्स शासन और समाज के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करेगी।




