सिंगरौली

सिंगरौली में इंड्रस्टियल ऑयल के आड़ में एनसीएल को करोड़ों की चपत

जयंत में पलटा टैंकर में था इंड्रस्टियल ऑयल, झिंगुरदह और खड़िया में जा रहा था टैंकर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। एनसीएल में काम करने वाली ओबी कंपनियों ने डीजल के नाम पर इंड्रस्टियल ऑयल खपा रही हैं। ऐसे में एनसीएल को करोड़ों की चपत लग रही है। यह पूरा खेल एनसीएल के अधिकारियों और परियोजना के कोयला क्रेशर के संचालक के मिलीभगत से हो रहा है। सूत्रों की बातों पर गौर करे तो बीते रविवार को जयंत के मुड़वानी डेम के पास एक टैंकर पलटा हुआ था। उसमें से डीजल निकल रहा था। टैंकर पलटने की हवा जैसे ही लोगों को लगी तो भारी संख्या में लोग बॉटल व जर्किन लेकर डीजल भरने पहुंच गये और खूब डीजल भरा। डीजल लेने वाले भी यह नही पता लगा पाये की यह डीजल है की कुछ और। खुलासा हुआ कि वह डीजल नही था, बल्कि डीजल के आड़ में इंड्रस्टियल ऑयल था, जो एनसीएल के झिंगुरदह परियोजना में जा रहा था। कुछ ऐसी बात हो गई कि झिंगुरदह न भेज कर खड़िया परियोजना पहुंचाया जा रहा था। इसी बीच हादसा हो गया और टैंकर पलट गया। यह संयोग ही कहे कि टैंकर न पलटता तो यह खुलासा भी न हो पाता। एनसीएल के विभिन्न परियोजनाओं में कोयला क्रेसर संचालित हैं। जहां कोयले को क्रेसिंग किया जाता है। इस कार्य के लिए कोयला क्रेसर संचालक ऊंचे दाम पर डीजल न खरीद कर कम रेट के चलते इंड्रस्टियल ऑयल का उपयोग वाहन में कर रहे हैं। भले ही क्रेसर संचालक कम दाम पर इंड्रस्टियल ऑयल खरीद रहे हैं लेकिन जो एनसीएल को बिल दे रहे हैं वह डीजल के रेट का दे रहे हैं। ऐसे में यह कह सकते हैं कि कोयला क्रेशर संचालक एनसीएल को लाखों का नही, बल्कि करोड़ों की चपत डीजल के नाम पर लगा रहे हैं। यह पूरा खेल एनसीएल के जिम्मेदार अधिकारी जो बिल बाउचर भरते हैं और उसको पास करते हैं, उनकी मिलीभगत के चलते एनसीएल को चूना लगाने में क्रेसर संचालक कोई कोर कसर नही छोड़ रहा है। यह कोई एक परियोजना की बात नही है, एनसीएल के अधिकांश परियोजनाओं में डीजल के आड़ में इंड्रस्टियल ऑयल का उपयोग धड़ल्ले के साथ हो रहा है। इसके बावजूद एनसीएल के जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्रवाई करने से गुरेज कर रहे हैं।
एनसीएल में बिल में होता है खेल
सूत्रों की बातों पर गौर करे तो इंड्रस्टियल ऑयल के नाम पर एनसीएल में करोड़ों रूपये की सेंधमारी डीजल के नाम पर कोयला क्रेसर संचालक व ओबी कंपनियां कर रही हैं। जबकि एनसीएल से इनका अनुबंध डीजल के लिए किया गया है और कोयला क्रेसर संचालक व ओबी कंपनियां डीजल का भुगतान एमपी के रेट से ले रही है। सूत्र तो बताते हैं कि इसकी जानकारी भले ही बड़े स्तर के अधिकारियों को न हो, लेकिन परियोजना में उन अधिकारियों को इसकी जानकारी विधिवत है। लेकिन कमीशन के चलते इस मामले को दबाया जा रहा है। कहा तो यह भी जाता है कि जब ओबी कंपनी और कोयला क्रेशर संचालक के डीजल भुगतान की फाईल एनसीएल के पास पहुंती है तो बिल बाउचर तैयार करने वाले के साथ भुगतान करने वाले अधिकारियों का पहले ही कमीशन मिल जाता है, तब कहीं जाकर भुगतान किया जाता है।
गुजरात से आ रहा इंड्रस्टियल ऑयल
सूत्रों की बातों पर गौर करे तो एनसीएल के झिंगुरदह और खड़िया परियोजना में जो इंड्रस्टियल ऑयल आ रहा है, यह कोई नया मामला नही है। यहां तो प्रतिदिन 30 हजार लीटर इंड्रस्टियल ऑयल लाकर खपाया जा रहा है। इस तरह अधिकांश परियोजनाओं में ओबी का काम कर रही कंपनियों के द्वारा इंड्रस्टियल ऑयल मंगाकर वाहनों में ईधन के रूप में कार्य कराया जा रहा है। सूत्र तो यह भी दावा करते हैं कि म.प्र. डीजल का रेट तकरीबन 96-97 रूपये चल रहा है और यह जो इंड्रस्टियल ऑयल गुजरात से मंगाया जा रहा है, सिंगरौली आकर 70 रूपये के रेट से पड़ रहा है। ऐसे में देखा जाये तो फर्क लगभग 26 से 27 रूपये आ रहा है। इस फर्क और बचत के नाम पर कोयला क्रेसर संचालक डीजल के नाम पर काफी मुनाफा कमाने के लिए एनसीएल को भारी झटका दे रहे हैं।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button