गाजियाबाद
यूनेस्को द्वारा दीपावली को वैश्विक अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा, सनातन समाज के लिए गर्व का क्षण : गोयल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी दिल्ली : यूनेस्को ने दीपावली को अपनी “अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर” सूची में सम्मिलित कर भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को नई अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 10 दिसंबर को राजधानी दिल्ली में दीपोत्सव का आयोजन विशेष उत्साह के साथ हुआ, जबकि पूरे देश में उत्सवी माहौल बना रहा। यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व राष्ट्रवादी शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने कहा कि यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय परंपराएँ केवल त्योहार नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाली जीवन-पद्धतियाँ हैं।
उन्होंने कहा कि जैसा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को 180 से अधिक देशों में बड़ी उत्सुकता के साथ मनाया जाता है, यह दर्शाता है कि योग अब केवल अभ्यास मात्र नहीं रहा, बल्कि विश्व के लिए एक स्थायी जीवनशैली और स्वास्थ्य का आधार बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक मंचों पर योग आज मानवता को जोड़ने वाली सार्वभौमिक कड़ी के रूप में स्थापित है। इसी प्रकार नेपाल, मॉरीशस, श्रीलंका, सूरीनाम, ट्रिनिडाड एंड टोबैगो, सिंगापुर और अमेरिका जैसे अनेक देशों में दीपावली को आधिकारिक अवकाश का दर्जा दिया जा चुका है, जो भारतीय संस्कृति की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति का स्पष्ट प्रमाण है।
गोयल ने कहा कि सनातन संस्कृति का प्रभाव आज विश्वभर में देखा जा सकता है। योग, ध्यान, आयुर्वेद, प्रकृति के साथ संतुलन, परिवार-केंद्रित सामाजिक व्यवस्था और दीपोत्सव जैसी परंपराएँ अब दुनिया के हर हिस्से में सम्मानित हो रही हैं। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में सनातन मूल्यों में समाहित शांति, सौहार्द और समरसता का संदेश मानवता के लिए मार्गदर्शक बन रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का उभार, वैश्विक दक्षिण की नेतृत्वकारी आवाज के रूप में उसकी भूमिका, तथा अंतरिक्ष, तकनीक, रक्षा और स्टार्टअप सेक्टर में अभूतपूर्व प्रगति यह संकेत देती है कि भारत केवल सांस्कृतिक शक्ति नहीं, बल्कि उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति है। “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना के साथ विश्वगुरु बनने की दिशा में भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलना हर भारतवासी के लिए गर्व और आत्मविश्वास का विषय है।


