
पुलिस-प्रधान व स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल
एसपी अर्पित विजयवर्गीय से लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष कार्रवाई की उठाई मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बाराबंकी। जनपद के मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां घर में घुसकर महिला और किशोरी पर कथित तौर पर जानलेवा हमला किया गया। घटना के बाद अब पीड़ित परिवार पुलिस, ग्राम प्रधान और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर गंभीर आरोप लगा रहा है, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित गुलाम नवी के अनुसार, 3 अप्रैल 2026 की रात करीब 8 बजे वह घर से बाहर था। घर पर उसकी भाभी ननकुन्नी उर्फ जैबुलनिशा और भतीजी राबिया मौजूद थीं। आरोप है कि पड़ोस के दबंग लोग पुरानी रंजिश के चलते ईंट, लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से लैस होकर घर में घुस आए।
हमलावरों ने गाली-गलौज करते हुए दोनों पर हमला कर दिया। राबिया के चेहरे पर ईंट से वार किया गया, जिससे उसका होंठ फट गया और जबड़ा प्रभावित हुआ। वहीं ननकुन्नी के सिर पर लोहे की रॉड से प्रहार किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। दोनों घायल मौके पर ही बेहोश हो गईं।
गंभीर चोटें, फिर भी ‘हल्का मुकदमा’?
घायलों को पहले सूरतगंज सीएचसी और फिर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनके सिर और चेहरे पर टांके लगे हैं। इसके बावजूद पीड़ित का आरोप है कि मेडिकल रिपोर्ट को “नॉर्मल” दिखाया गया और पुलिस ने भी गंभीर धाराओं के बजाय मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।
प्रधान के दबाव का आरोप
पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि पूरे मामले में ग्राम प्रधान के दबाव में पुलिस ने कार्रवाई को कमजोर किया। उनका कहना है कि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, उन्हें जानबूझकर नहीं लगाया गया, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों पर दबाव बनाया गया और आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
धमकियां और दबंगई जारी
पीड़ित का यह भी आरोप है कि आरोपी खुलेआम धमकी दे रहे हैं—“मुकदमा वापस ले लो, हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे।” इससे परिवार दहशत में है।
उठते बड़े सवाल
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—क्या मोहम्मदपुर खाला पुलिस दबंगों और प्रधान के प्रभाव में काम कर रही है? क्या गंभीर चोटों के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट में हेरफेर किया गया? क्या पीड़ित को न्याय के बजाय दबाव झेलना पड़ रहा है?
न्याय की गुहार
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मुकदमे में गंभीर धाराएं जोड़ी जाएं, निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। फिलहाल पीड़ित परिवार जिला अस्पताल में इलाज करा रहा है, लेकिन न्याय की उम्मीद में दर-दर भटकने को मजबूर है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और पीड़ितों को कब न्याय मिल पाता है



